सीजी न्यूज ऑनलाइन डेस्क 30 जनवरी । कहते हैं न कि अगर लाइफ में सही हमसफर मिल जाए तो जिंदगी जीने का मजा ही दोगुना हो जाता है। लेकिन समस्या ये है कि अक्सर सही पार्टनर चुनना बहुत मुश्किल भरा काम बन जाता है। अगर अच्छा जीवनसाथी न मिले, तो अच्छी खासी जिंदगी भी बर्बाद होकर ही रहती है।
शादी जीवन के सबसे अहम फैसले में से एक है, क्योंकि पति-पत्नी एक दूसरे के सुख दुख के साथी जो होते हैं। लेकिन जिंदगी का ये महत्वपूर्ण फैसला लेने में अगर जरा सी भी चूक हो जाती है, तो जीवनभर पछतावे के अलावा कुछ नहीं रह जाता। ऐसे में मन में ये सवाल आना जायज है कि आखिर अच्छा पार्टनर ढूंढ पाना इतना मुश्किल क्यों है? और अगर वो मिल भी जाए, तो हेल्दी रिलेशनशिप को बनाकर रखना और जिंदगीभर सकारात्मकता के साथ इसे चलाना क्यों कइयों के लिए बड़ी चुनौती सा बन जाता है?
यही दो सवाल एक इंटरव्यू के दौरान जब आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से पूछे गए, तो उन्होंने इसका ऐसा उत्तर दिया, जिसके बारे में बेहद कम ही लोग सोचते हैं। (फोटो साभार: फेसबुक@Gurudev Sri Sri Ravi Shankar)
रविशंकर ने बताया कि कैसे पार्टनर को लेकर असल में व्यक्ति खुद ही जिम्मेदार होता है। ‘अक्सर सही व गलत पार्टनर का चुनाव हमारी खुद की वाइब्रेशन पर निर्भर करता है। जैसे अगर हमारी वाइब्रेशन पॉजिटिव है, हम अच्छा सोचते हैं, तो निश्चित ही हम ऐसे लोगों की ओर अट्रैक्ट होते हैं, जो पॉजिटिव वाइब्स वाले होते हैं।
लेकिन अगर हमारी वाइब्रेशन नेगेटिव, डाउटफुल व लालच से भरी हुई होगी, तो हम ऐसे लोगों के साथ ही रिलेशनशिप में आते हैं, जिनमें हमारे जैसी ही वाइब्स होती हैं। इसलिए अगर आप सही पार्टनर चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी वाइब्स को इम्प्रूव करें।’
श्री श्री रविशंकर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा ‘एक इंग्लिश कहावत है कि बर्ड्स ऑफ द सेम फैदर फ्लॉक्स टुगेदर (एक जैसे पंख वाले पक्षी एक साथ झुंड में रहते हैं)। तो हमें सबसे पहले अपनी वाइब्रेशन पर ही काम करना होगा और आमतौर पर इस पक्ष पर लोग कम ही ध्यान देते हैं।’
तात्पर्य ये है कि समान प्रकार, रुचि, व्यक्तित्व, चरित्र या अन्य विशिष्ट गुण वाले प्राणी (आमतौर पर मनुष्य) परस्पर जुड़ते हैं। यानि जैसे आप होंगे वैसे ही लोग आपके साथ जुड़ेंगे।
अपनी वाइब्रेशन को बदलने का सबसे अच्छा और असरदार तरीका है कि अपनी सोच को सकारात्मक रखने की कोशिश करें। अगर जीवन में कुछ गलत भी चल रहा है, तो उसमें से कुछ पॉजिटिव एंगल निकालने की कोशिश करें।
किसी व्यक्ति से मिलें या उसमें कमी तलाशने की जगह सबसे पहले उसकी खूबियों पर ध्यान दें। इस प्रैक्टिस को जब आप बार-बार करेंगे, तो ये आपके व्यक्तित्व का ही हिस्सा बन जाएगा। इससे आपकी ओवरऑल वाइब्स भी पॉजिटिव होने लगेंगीं।

