जूनियर ऑफिसर परीक्षा पॉलिसी एक अभिशाप, प्रभावित कर्मचारियों के साथ अन्याय यूनियन द्वारा चेयरमैन को लिखा गया पत्र, प्रबंधन की ओर से अब तक नहीं किया निराकरण


जूनियर ऑफिसर परीक्षा पॉलिसी एक अभिशाप, प्रभावित कर्मचारियों के साथ अन्याय यूनियन द्वारा चेयरमैन को लिखा गया पत्र, प्रबंधन की ओर से अब तक नहीं किया निराकरण

भिलाई नगर 22 मार्च । भिलाई श्रमिक सभा एचएमएस के महासचिव प्रमोद कुमार मिश्र ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि कुछ यूनियन द्वारा कर्मचारियों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है कि एसीटी जिनकी शैक्षणिक योग्यता आईटीआई है, जूनियर ऑफिसर परीक्षा पॉलिसी में भाग ले सकेंगे । जबकि प्रबंधन द्वारा जारी पॉलिसी के अनुसार जूनियर ऑफिसर परीक्षा पॉलिसी के लिए आवश्यक योग्यता पूर्ण करने में अभी भी कम से कम 8 वर्ष का समय लगेगा एवं ओसीटी जो मार्च 2008 में भर्ती हुए हैं जिन्हें डिप्लोमा इंजीनियर ट्रेनी के नाम से विज्ञापन निकालकर सेल में टेक्नीशियन एवं आपरेटर बनाया गया था । जिनकी ट्रेनिंग 1 वर्ष थी उसे उनके सेवाकाल में नहीं जोड़ा गया है। जो उन कर्मचारियों के साथ में अन्याय हैं इसके लिए यूनियन द्वारा कई बार सेल चेयरमैन को पत्र लिखा जा चुका है।

 नवंबर 2008 में भर्ती हुए ओ सी टी का ट्रेनिंग पीरियड 2 वर्ष का था उनका ट्रेनिंग पीरियड सेवाकाल में जोड़ दिया गया है। इन दोनों प्रकार के भर्ती हुए कर्मचारी जिनकी शैक्षणिक योग्यता इंजीनियरिंग की है वे 2022 में आयोजित जूनियर ऑफिसर परीक्षा में शामिल हो सकेंगे । नवंबर 2008 के पश्चात  भर्ती हुए कर्मचारी जो एस 3 ग्रेड में भर्ती हुए हैं यदि उनका ट्रेनिंग पीरियड उनके सेवा काल से जोड़ दिया जाता है तब भी वे इस पॉलिसी के अनुसार जूनियर ऑफिसर परीक्षा पॉलिसी में परीक्षा देने के लिए दिसंबर 2024 तक पात्र नहीं होंगे।

 जूनियर ऑफिसर परीक्षा पॉलिसी जो 2022 में लाई गई है । यह 2018 में लाई गई पॉलिसी के समान ही हैं जिसमें वरिष्ठ कर्मचारियों की सीनियारिटी को नजरअंदाज किया गया था। 2022 की पॉलिसी में भी कुछ नया नहीं है इसे ऐसा कहा जाना उचित होगा कि बोतल नई है शराब पुरानी है कुछ यूनियनों द्वारा आगामी यूनियन के चुनाव को देखकर भ्रम फैलाकर कर्मचारियों को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटका जा सके । इसमें प्रबंधन की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। इस परीक्षा की पॉलिसी के अनुसार इसमें पारदर्शिता का अभाव है । सारे पीएसयू एवं बैंक में, कर्मचारी से अधिकारी बनने के लिए लिखित परीक्षा के साथ-साथ साक्षात्कार नहीं होता इनमें से किसी एक को ही चुना जाता है एवं नौकरी मैं 2,5 एवं 10 वर्ष पूर्ण करने का कोई बंधन नहीं होता सेल के अंतर्गत आयोजित परीक्षा में लिखित एवं साक्षात्कार दोनों होता है एवं एस 6 के पश्चात 2, 5 से 10 वर्ष  नौकरी पूर्ण करने का बंधन है ऐसा सेल को छोड़कर किसी सार्वजनिक उपक्रम में नहीं है एवं लिखित परीक्षा में पारदर्शिता का अभाव है । यदि लिखित परीक्षा में ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी लिखित परीक्षा के उपरांत दे दी जाए तथा सही उत्तर इंटरनेट में परीक्षा के उपरांत जारी कर दिए जाएं तो कर्मचारी  संतुष्ट हो सकेंगे तथा इस प्रकार की प्रक्रिया ना होने के कारण सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी 2008 से लेकर 2018 तक की गई आयोजित परीक्षा के विरुद्ध न्यायालय की शरण में गए हैं एवं बोकारो इस्पात संयंत्र में तो सीबीआई का छापा तक पड़ चुका है यदि लिखित परीक्षा में पारदर्शिता लाई जाती है तो यह संभव है कि कई कर्मचारी न्यायालय से अपना केस वापस भी ले सकते हैं।