केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई नहीं कर सकता SEBI 🟦 चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने सेबी की निर्भरता पर जताई चिंता 🟪 OCCRP और हिंडनबर्ग रिसर्च जैसे संगठनों की रिपोर्टों की जानकारी के उपयोग पर भी जताई नाराजगी

<em>केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई नहीं कर सकता SEBI 🟦 चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने सेबी की निर्भरता पर जताई चिंता 🟪 OCCRP और हिंडनबर्ग रिसर्च जैसे संगठनों की रिपोर्टों की जानकारी के उपयोग पर भी जताई नाराजगी</em>



सीजी न्यूज आनलाईन डेस्क, 25 नवंबर। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने अडाणी-हिंडनबर्ग मामले में याचिकाकर्ताओं द्वारा अडाणी समूह और भारत की नियामक प्रणाली के खिलाफ आरोप लगाने के लिए कुछ मीडिया रिपोर्टों पर निर्भरता पर चिंता व्यक्त की है।
अदालत ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह अपने निष्कर्ष निकालने के लिए अखबारों की रिपोर्ट में कही गई बातों पर जायेगा। मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ताओं द्वारा ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीआरपी) और हिंडनबर्ग रिसर्च जैसे संगठनों की रिपोर्टों की जानकारी के उपयोग पर भी नाराजगी व्यक्त की है।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा चल रहे मामले में लगभग तीन महीने के अंतराल के बाद सुनवाई फिर से शुरू करने के बाद ये टिप्पणियां आईं है। भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ओसीसीआरपी रिपोर्ट के संबंध में नए तथ्य कोर्ट के संज्ञान में लाए। मेहता के अनुसार, जब सेबी ने ओसीसीआरपी को पत्र लिखकर 31 अगस्त की रिपोर्ट में अदानी समूह के खिलाफ आरोप लगाते समय संगठन द्वारा भरोसा किए गए विवरण और दस्तावेजों की मांग की, तो ओसीसीआरपी ने आरोपों का विवरण साझा नहीं किया, और कहा कि इसकी बजाय वे भारत में एक गैर-सरकारी संगठन से विवरण प्राप्त कर सकते हैं, जिसने उसे जानकारी प्रदान की थी। सॉलिसिटर जनरल के मुताबिक, एनजीओ को प्रशांत भूषण चलाते हैं। सुनवाई के दौरान मेहता ने कोर्ट को बताया कि अडाणी समूह के खिलाफ आरोपों से जुड़े 24 में से 22 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि शेष दो के लिए, हमें कुछ अन्य सूचनाओं के साथ विदेशी नियामकों आदि से जानकारी की आवश्यकता है। हम उनके साथ परामर्श कर रहे हैं। कुछ जानकारी आई है लेकिन स्पष्ट कारणों से समय सीमा पर हमारा नियंत्रण नहीं है।
गौरतलब हो कि ओसीसीआरपी के आरोपों को खारिज करते हुए अडाणी समूह ने रिपोर्ट को “योग्यताहीन हिंडनबर्ग रिपोर्ट” को पुनर्जीवित करने के लिए विदेशी मीडिया के एक वर्ग द्वारा समर्थित सोरोस-वित्त पोषित हितों द्वारा एक और ठोस प्रयास करार दिया था। अडाणी समूह ने कहा था कि ये दावे एक दशक पहले के बंद मामलों पर आधारित हैं जब राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने ओवर इनवॉयसिंग, विदेश में फंड ट्रांसफर, संबंधित पार्टी लेनदेन और एफपीआई के माध्यम से निवेश के आरोपों की जांच की थी। एक स्वतंत्र निर्णायक प्राधिकारी और एक अपीलीय न्यायाधिकरण दोनों ने पुष्टि की थी कि कोई ओवर वैल्यूएशन नहीं था और लेनदेन लागू कानून के अनुसार थे। मार्च 2023 में मामले को अंतिम रूप दिया गया तब सुप्रीम कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला सुनाया। चूंकि कोई ओवरवैल्यूएशन नहीं था इसलिए धन के हस्तांतरण पर इन आरोपों की कोई प्रासंगिकता या आधार नहीं है।