इस्पात मंत्रालय के निर्देश को लागू कराने डिप्लोमा इंजिनियर्स ने निकाला पैदल मार्च, सैकड़ो की संख्या में डिप्लोमा इंजिनियर्स हुए शामिल

इस्पात मंत्रालय के निर्देश को लागू कराने डिप्लोमा इंजिनियर्स ने निकाला पैदल मार्च, सैकड़ो की संख्या में डिप्लोमा इंजिनियर्स हुए शामिल


इस्पात मंत्रालय के निर्देश को लागू कराने डिप्लोमा इंजिनियर्स ने निकाला पैदल मार्च, सैकड़ो की संख्या में डिप्लोमा इंजिनियर्स हुए शामिल

भिलाई नगर 19 मई । इस्पात मंत्रालय द्वारा पीएसयू संयंत्रों सेल, आरआईएनएल के डिप्लोमा इंजिनियर्स  के पदनाम व कैरियर ग्रोथ के लिए बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी की अनुशंसाएँ लागू करवाने बीएसपी सहित सेल के  सभी सयंत्रो के डिप्लोमा अभियंताओं द्वारा कल साइलेंट मार्च निकाला गया व विगत पाँच वर्षों से इस विषय पर रखे गए मौन का मौन पैदल मार्च निकाल कर ही प्रतीकात्मक विरोध किया। डेफि अध्यक्ष नरेंद्रनाथ दास ने कहा कि डिप्लोमा इंजिनियर्स द्वारा जूनियर इंजीनियर आदेश मई 2017 में आने के बाद विगत पाँच वर्षों में अलग अलग स्तर पर इसे लागू कराने प्रयास किये जा चुके है, व अभी तक यह प्रयास जारी है।  पदनाम का यह विषय भले ही नॉन फाइनेंसियल है पर इससे सयंत्र के उत्पादन क्षमता व सुरक्षा पर इसका बड़ा सकारात्मक असर दिखेगा।

डेब अध्यक्ष राजेश शर्मा ने कहा कि सेल का डिप्लोमा इंजिनियर शायद पहला ऐसा वर्ग है जो की बिना कंपनी पर अतिरिक्त भार डाले पहले से ज्यादा उत्तरदायित्व का निर्वहन करना चाहता है,पर इसे विगत पाँच सालों से क्यों लटकाया जा रहा है यह किसी भी कर्मचारी के समझ से परे है।

जूनियर के साथ वरिष्ठ डिप्लोमा इंजीनियर भी नाराज

वरिष्ठ डिप्लोमा इंजीनियर्स का कहना है सेल मैनेजमेंट ने इस पढ़े लिखे एवं समर्पित वर्ग के साथ हमेशा अन्याय किया है चाहे वह पदनाम का मामला हो या ग्रोथ का कभी इस वर्ग के लिए अच्छा नही हुआ।

 यहां सुपरवाइजर कैडर के ना होने से सीधा नुकसान सयंत्र व इस वर्ग का हुआ है,साथ ही वर्कर कैडर होते हुए भी यूनियनों का व्यवहार सहयोगपूर्ण नही रहा। उन्होंने कभी इस वर्ग को अपना नहीं समझा। इसीलिए ना तो कोई अच्छी प्रमोशन पॉलिसी बन पाई और ना ही कोई अच्छा पदनाम नहीं मिल पाया  ! 2010 से 2018 तक ईo  प्रमोशन नहीं हुआ फिर भी किसी यूनियन ने कभी कोई आवाज नहीं उठाई न ही इसके लिए कोई प्रदर्शन हुए।और प्रबंधन सब जानते हुए भी मूकदर्शक बना रहा, वर्षों पहले वर्कर में अधिकतम ग्रेड s8 हुआ करता था एवं डिप्लोमा योग्यता वालों का जॉइनिंग s6 में होती थी और वह जल्दी ही अधिकारी वर्ग में पदोन्नत हो जाते थे इसलिए उस समय असंतोष नहीं होता था और ना ही कोई इस योग्यता वाला यूनियन गतिविधियों में सक्रिय होता था इसीलिए यूनियन के बड़े नेता भी गैर डिप्लोमा इंजीनियर ही रहे।

सेल अध्यक्षा के नाम दिया ज्ञापन

सैकड़ो की संख्या में शामिल डिप्लोमा इंजिनियर्स द्वारा पैदल मार्च का समापन मुर्गा चौक आईआर गेट के सामने किया गया व समापन के बाद सेल चेयरमैन के नाम ज्ञापन दे इस्पात मंत्रालय के आदेश 37)/2016-SAIL-PC को जल्द से जल्द  डिप्लोमा इंजिनियर्स के पक्ष में लागू करने की मांग की गई कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डेब महासचिव अभिषेक सिंह उपाध्यक्ष मोहम्मद रफी, शिव शंकर तिवारी, उषाकर चौधरी, घनश्याम साहू , नील पटेल, अभिषेक सिंह,उपमहासचिव सुदर्शन , के गणेश, मनीष यादव, कोषाध्यक्ष रमेश कुमार संगठन सचिव पवन साहू, जोनल सेक्रटरी सौरभ सुमन, दीपेश चुग, अजय तमुरिया,  रवि अरसे, पुपुल नायक, परम हंश, अनुज, प्रमोद वर्मा, रंजन, शशि वर्मा, धर्मेंद्र दलाल , श्रीनिवास, निशांत, संतोष, काशीराम मांझी, अंचु कुमार, मुरली, शुरेश, मेटा जगदीश आदि सहित सैकड़ों कि संख्या में डिप्लोमा इंजिनियर्स उपस्थित थे।