पीएचडी थीसिस जमा करने की अधिकतम एवं न्यूनतम अवधि होगी इतनी, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग में अंग्रेजी एवं हिन्दी के शोधार्थियों एवं रिसर्च गाइड हेतु आयोजित हुई कार्यशाला

<em>पीएचडी थीसिस जमा करने की अधिकतम एवं न्यूनतम अवधि होगी इतनी, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग में अंग्रेजी एवं हिन्दी के शोधार्थियों एवं रिसर्च गाइड हेतु आयोजित हुई कार्यशाला</em>


दुर्ग 4 नवंबर । हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग से सम्बद्ध 15 शोधकेन्द्रों में पीएचडी हेतु पंजीकृत शोधार्थियों एवं शोधनिर्देशको के लिए विश्वविद्यालय परिसर स्थित टैगोर हाॅल में एक दिवसीय  कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि आज आयोजित कार्यशाला में लगभग 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में प्रारंभ में कुलपति, डाॅ. अरूणा पल्टा ने पीएचडी करने वाले शोधार्थियों को शोध प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। डाॅ. पल्टा ने शोध थीसिस जमा करते समय संदर्भ सूची, आंकड़ों को प्रदर्शित करने वाली सारिणी तथा ग्राफ आदि के विषय में विस्तार से समझाया।

डाॅ. पल्टा ने समस्त प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वें ऐसे शोध विषय का चयन करे जो समाज के हित में हों। डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव ने अपने प्रस्तुतिकरण में पावर प्वाइंट के माध्यम से पीएचडी प्रवेश परीक्षा से लेकर पीएचडी थीसिस जमा होने के संपूर्ण प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। डाॅ. श्रीवास्तव ने बताया कि यूजीसी द्वारा 07 नवंबर 2022 को प्रकाशित असाधारण राजपत्र के अनुसार ऐसे प्राध्यापक जिन्हें सेवा निवृत्त के तीन वर्ष शेष है वें अपने मार्गदर्शन में शोधार्थियों को पंजीकृत नहीं करा सकते। अब पीएचडी शोधार्थियों हेतु पीएचडी थीसिस जमा करने की अधिकतम अवधि 06 साल तथा न्यूनतम अवधि 03 साल होगी। महिला शोधार्थियों को 240 दिन का मातृत्व अवकाश की पात्रता होगी।

विष्वविद्यालय की डीसीडीसी, डाॅ. प्रीता लाल ने पीएचडी थीसिस तैयार करने से संबंधित महत्वपूर्ण बिन्दु जैसे शोध प्रविधि, निष्कर्ष तथा शोध संबंधी प्रश्नावली एवं संदर्भ सूची तैयार करने के बारे में बारीकि से सभी प्रतिभागियों को जानकारी दी। कार्यशाला के दौरान उपस्थित शोधार्थियों एवं शोधनिर्देशकों ने अनेक प्रष्न पुछकर अपनी जिज्ञासा को शांत किया।