मेडिकल एंट्रेस में फिजिक्स न बने कमजोरी इसलिए बायो-मैथ्स लेकर पूरी की स्कूलिंग,दू सरे अटेम्ट में ऑल इंडिया पीएमटी क्वालीफाई करने वाले भिलाई के डॉ. रजत के सफलता की कहानी
भिलाई नगर 24 मई । परीक्षा हॉल में एग्जाम का प्रेशर एक ऐसे कुकर की तरह है जिसकी सीटी अगर सही समय पर नहीं बजी तो वो फट भी सकता है। कुछ इसी तरह के एग्जाम प्रेशर से जूझते थे भिलाई के डॉक्टर रजत देव। वे कहते हैं कि डॉक्टर बनना उनके बचपन का सपना था। जब इस सपना को पूरा करने के लिए मैं परीक्षा देने पहली बार गया तो एग्जाम हॉल में मानसिक रूप से काफी दबाव महसूस करने लगा। यही कारण है कि कई सवालों के जवाब आते हुए भी उसे समय पर साल्व नहीं कर पाया। इसी कमी को दूर करने के लिए मुझे एक साल ड्रॉप लेकर तैयारी करनी पड़ी। एक साल तक मेडिकल एंट्रेस के पैटर्न के समझकर बेसिक पर जी जान लगाकर मेहनत की। साल 2011 में अपने दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया पीएमटी क्वालीफाई करके इंदौर के नामी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया। उसके बाद कभी पलटकर नहीं देखा आज जब एग्जाम प्रेशर के बारे में सोचता हूं तो लगता है कि एक हद तक ये प्रेशर भी जरूरी है क्योंकि ये आपको स्पर्धा के रेस में बनाए रखने के लिए और ज्यादा मेहनत करने की प्रेरणा देता है। अगर प्रेशर नहीं रहेगा तो शायद मेहनत में कुछ कमी रह जाएगी पर एग्जाम प्रेशर को कभी खुद पर हावी न होने दें।
फिजिक्स का बेस स्ट्रांग करने बायो-मैथ्स लेकर पढ़ाई की
जबलपुर मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेसीडेंट के रूप में पीजी की पढ़ाई कर रहे डॉ. रजत ने बताया कि उन्होंने 12 वीं बोर्ड बायो-मैथ्स विषय में दिया। बायो के साथ 11 वीं में मैथ्स लेने के पीछे लॉजिक ये था कि इससे फिजिक्स का बेस स्ट्रांग हो गया। प्लेन बायो पढ़कर मेडिकल एंट्रेस की तैयारी कर रहे बच्चों के लिए फिजिक्स काफी टफ पड़ता है। इसलिए इस वीकनेस को स्ट्रांग प्वाइंट में बदलने के लिए दोनों विषयों की साथ-साथ स्कूल में पढ़ाई करता गया। जिसका लाभ भी सीपीएमटी की तैयारी में मिला।
सचदेवा में मिला हेल्दी माहौल
डॉ. रजत ने बताया कि जब उन्होंने एक साल का ड्रॉप लिया तब अपने सीनियर्स और साथ में पढ़कर सलेक्ट हुए बच्चों से सचदेवा कोचिंग के बारे में काफी सुना था। इसलिए ड्रॉप सेशन में तैयारी के लिए सचदेवा को ही चुना। यहां का हेल्दी माहौल ही था कि तैयारी के साथ टेस्ट सीरिज में खुद को परख पाया। पढ़ाई के दौरान जब भी तनाव में होता तब चिरंजीव जैन सर पर्सनली काउंसलिंग कर देते थे। उस काउंसलिंग की बदौलत कभी भी दिमाग में नेगेटिविटी हावी नहीं हुई। उनकी मोटिवेशन बातों से सकरात्मक ऊर्जा मिलती थी। कोचिंग में टीचर्स हर छोटे से छोटे टॉपिक को भी कवर करके उसका फंडा क्लीयर करते थे। ये छोटी-छोटी लेकिन महत्वपूर्ण बातें सक्सेस मंत्र बनी। आज जब किसी मरीज का इलाज करता हूं तो लगता है कि डॉक्टर से अच्छा कोई प्रोफेशन नहीं है।
गलतियों से सीखें, उसे दोहराए नहीं
नीट की तैयारी कर रहे बच्चों से कहूंगा कि आप अपनी गलतियों से सीखने की कोशिश करो। उन गलतियों को सुधारकर दोबारा मत दोहराओ। अगर कभी लगे कि हमारी तैयारी पूरी नहीं है और आप डिप्रश्ेान में जा रहे तो काउंसलिंग के जरिए किसी एक्सपर्ट की मदद भी ले सकते हैं। एग्जाम हॉल में एक हड़बड़ी आपको भारी पड़ सकती है। इसलिए पढऩे के साथ-साथ परीक्षा कक्ष के प्रेशर को झेलने के लिए पहले से खुद को मेंटली प्रिपेयर करो।

