रावण के पुतले पर लिखा था 🟧 “सनातन धर्म के विरोध का अंत हो” 🟦 और फिर रावण को लगाई आग 🔥 पर मेघनाथ और कुंभकर्ण नहीं जलाए गए 🟩 आग में जलने से क्यों बच गए कुंभकर्ण और इंद्रजीत….❓🟪 जानिए वजह…..❗

<em>रावण के पुतले पर लिखा था 🟧 “सनातन धर्म के विरोध का अंत हो” 🟦 और फिर रावण को लगाई आग 🔥 पर मेघनाथ और कुंभकर्ण नहीं जलाए गए 🟩 आग में जलने से क्यों बच गए कुंभकर्ण और इंद्रजीत….❓🟪 जानिए वजह…..❗</em>



सीजी न्यूज आनलाईन डेस्क, 25 अक्टूबर। देश भर में कल विजय दशमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। जमकर आतिशबाजी और रामलीला मंचन के साथ रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी पूरे हर्षोल्लास के साथ विजय दशमी का पर्व मनाया गया। ऐशबाग की ऐतिहासिक रामलीला मैदान में राम लीला का मंचन भी किया गया। यहां पहले मेघनाद का वध हुआ फिर श्रीराम ने अपने शारंग नामक धनुष से रावण का वध किया। वध के साथ ही 80 फीट ऊंचे रावण के पुतले को जलाया गया। रावण के पुतले पर लिखा था “सनातन धर्म के विरोध का अंत हो”। हालांकि पहले की ही तरह इस बार भी रावण के पुतले के साथ कुम्भकर्ण और मेघनाथ के पुतले का दहन समिति ने नहीं किया।
रावण वध के समय डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और राज्य सभा सांसद दिनेश शर्मा मौजूद रहे। रावण के पुतले के दहन से पूर्व शानदार आतिश बाजी भी की गई।
आपको बता दें कि लखनऊ के ऐशबाग स्थित रामलीला मैदान में सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। भारी संख्या में अधिकारियों के साथ पुलिस फोर्स मौजूद रही। आरएएफ के जवानों को भी सिक्योरिटी के तौर पर तैनात किया गया था। लेकिन इस बार भी पिछली बार की ही तरह सिर्फ रावण का 80 फीट ऊंचा पुतला ही जलाया गया। दरअसल, इसके पीछे का कारण यह था कि जब भगवान राम के साथ रावण का युद्ध हो रहा था तो मेघनाथ और कुम्भकर्ण ने रावण को समझाया था कि वो प्रभु श्रीराम हैं, साक्षात ईश्वर स्वरूप हैं और देवी सीता कोई और नहीं साक्षात जगदंबा हैं। इसीलिए रावण को उनकी शरण में तत्काल चले जाना चाहिए और युद्ध पर विराम लगा देना चाहिए। मेघनाथ और कुम्भकर्ण ने सिर्फ रावण के आदेश पर श्रीराम से युद्ध किया था इसलिए रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाथ को नहीं जलाया गया।