दुर्ग 19 अक्टूबर । हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग में कुलपति, डाॅ. अरूणा पल्टा ने शिक्षा संकाय तथा वाणिज्य संकाय के लगभग 300 से अधिक शोधार्थियों एवं शोधनिर्देशकों की क्लाॅस लेकर पीएचडी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। डाॅ. पल्टा ने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वें मौलिक एवं समाज के हित में उपयोगी शोधकार्य करें केवल अलमारी में बंद रखने हेतु किये जाने वाले शोध कार्य को हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग स्वीकार नहीं करेगा। यह जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि डाॅ. पल्टा ने पीएचडी थीसिस में शोधार्थियों द्वारा संदर्भ सूची में की जाने वाली गलतियां एवं उनके निराकरण के बारे में विस्तार से बताया। डाॅ. पल्टा ने कहा कि अनावश्यक बिन्दुओं को जोड़कर पीएचडी थीसिस की मोटाई बढ़ाने का बिल्कुल प्रयास न करे।

डाॅ. पल्टा ने कहा कि पीएचडी थीसिस में केवल विषय से संबंधित सारगर्भित जानकारी दें तथा आंकड़ों की पुनरावृति भी न करें। उन्होंने शोधकेन्द्र के सभी सदस्य प्राध्यापकों से आग्रह किया कि वें शोधार्थी के प्री-पीएचडी वायवा के दौरान गंभीरतापूर्वक अवलोकन करे तथा शोधार्थी की सारी कमियों को उसी स्तर पर निराकरण करे। डाॅ. पल्टा के पष्चात् विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव ने उपस्थित प्रतिभागियों को यूजीसी द्वारा राजपत्र प्रकाशित कर लागू किये गये नियम 2022 की बिन्दुवार जानकारी दी।
दूसरे तकनीकी सत्र में विश्वविद्यालय की पीएचडी सेल प्रभारी, डाॅ. प्रीता लाल ने पीएचडी थीसिस के संबंध में विभिन्न अध्यायों की विषय-वस्तु एवं उनके लेखन शैली तथा आंकड़ों के प्रदर्शन एवं सांख्यिकीय विश्लेषण की विस्तार से जानकारी दी। विश्वविद्यालय की पीएचडी सेल में कार्यरत डॉक्टर भावना पर्वत ने शोधार्थियों को शोधकेन्द्र में प्रवेश से लेकर पीएचडी डिग्री अवार्ड होने तक के प्रक्रिया की चरणबद्ध जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीएचडी वायवा से पूर्व शोधार्थियों द्वारा बनाये गये पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण को विश्वविद्यालय के पीएचडी सेल से अनुमोदित कराना आवश्यक है।

