दुर्ग 24 सितंबर । हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग द्वारा संचालित एक माह अवधि के ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स को सभी 75 प्रतिभागियों ने अत्यंत सराहा है। ’’छत्तीसगढ़ की जनजाति’’ विषय पर आयोजित इस सर्टिफिकेट कोर्स के प्रथम व्याख्यान में पं. रवि शंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर, की मानव शास्त्र विषय की सेवा निवृत्त प्राध्यापक, डाॅ. मिताश्रीमित्रा ने ’’छत्तीसगढ़ में जनजाति के यात्रा’’ का गहराई से विश्लेषण किया। पावर प्वाइंट के माध्यम से डाॅ. मित्रा ने प्राचीन समय से लेकर वर्तमान तक जनजातियों पर पड़ने वाले पर्यावरणीय सामाजिक, आर्थिक राजनीतिक प्रभावों पर चर्चा की। प्रतिभागियों ने अनेक प्रश्न पुछकर अपनी जिज्ञासा शांत किया।
यह जानकारी देते हुए सर्टिफिकेट कोर्स की समन्वयक, डाॅ. प्रीता लाल ने बताया कि उद्घाटन सत्र में ऑनलाइन रूप से उपस्थित विश्वविद्यालय की कुलपति, डाॅ. अरूणा पल्टा ने कहा कि जनजातियां हमारे छत्तीसगढ़ प्रदेश के महत्वपूर्ण अंग है। हम सभी को उनके आवास, वेशभूषा चिकित्सीय ज्ञान, परम्परा, रीति-रिवाजों का सम्मान करना चाहिए। डाॅ. पल्टा ने इस प्रकार के सर्टिफिकेट कोर्स को प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
द्वितीय आमंत्रित व्याख्यान में दुर्ग विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव छत्तीसगढ़ की जनजाति-एक सिंहावलोकन’’ पर अपने विचार रखे। पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से तथा वीडियो फिल्म दिखाकर डाॅ. श्रीवास्तव ने बहुत ही रोचक ढंग से जानकारी दी। सभी उपस्थित प्रतिभागियों ने डाॅ. श्रीवास्तव के व्याख्यान की सराहना की। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय द्वारा चलाये जा रहे सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों की श्रृंखला में यह आठवां पाठ्यक्रम है जो 15 अक्टूबर तक चलेगा। इसके अंतर्गत आयोजित व्याख्यानों की विषय सामाग्री प्रतिभागियों को उपलब्ध करायी जाती है। जिनमें वे अगामी भविष्य के लिए तथा पाठ्यक्रम की लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होने हेतु अध्ययन करते है। डाॅ. लाल ने बताया कि इस सर्टिफिकेट कोर्स में प्राचार्य प्राध्यापक, शोधार्थी, गृहणी तथा 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोग भी हिस्सा ले रहे हैं।
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग द्वारा संचालित छत्तीसगढ़ की जनजातियों पर ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स को प्रतिभागियों ने सराहा

