दुर्ग 16 सितंबर । मिलेट को अपने दैनिक भोजन में शामिल करें यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहतर होते है। छत्तीसगढ़ को मिलेट्स हब कहा जाता है। ये उद्गार हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग की कुलपति डाॅ. अरूणा पल्टा ने विश्वविद्यालय द्वारा अपने से सम्बद्ध महाविद्यालयों में मिलेट्स के महत्व पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये। डाॅ. अरूणा पल्टा ने कहा कि भारत में मुख्यतः 07 प्रकार के मिलेट्स का उत्पादन होता है। रागी, कंगनी, ज्वार, बाजरा, राजगीर, कोदो, कुटकी आदि मिलेट्स के प्रतिदिन सेवन से किडनी, लिवर, हृदय रोग, ब्लड प्रेशर एवं मधुमेह जैसी बिमारियों के निदान में मदद मिलती है।
यह जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव ने बताया कि अंतर्गत आयोजित गतिविधियों में मिलेट्स व्यंजन प्रतियोगिता, महिलाओं को जल संरक्षण की जानकारी, मिलेट्स एवं एनीमिया पर आधारित आमंत्रित व्याख्यान तथा क्विज, पोस्टर, माॅडल प्रतियोगिता तथा स्वस्थ्य शिशु स्पर्धा शामिल है। इन गतिविधियों को आयोजित करने वाले महाविद्यालयों में भिलाई महिला महाविद्यालय भिलाई, श्री शंकराचार्य महाविद्यालय, जुनवानी, स्वामी श्री स्वरूपानंद महाविद्यालय हुडको , शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय उतई, शासकीय महाविद्यालय डोंगरगांव, एम. जे. कॉलेज, कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खालसा महाविद्यालय, मालवीय नगर, मनसा शिक्षा महाविद्यालय, शामिल है।
डाॅ. श्रीवास्तव ने बताया कि मिलेट्स के व्यजंन स्पर्धा में शासकीय पीजी काॅलेज, कवर्धा के छात्र ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। पोषण माह से संबंधित व्यंजन स्पर्धा में निर्णायक के रूप में भिलाई महिला महाविद्यालय, की प्राचार्य डाॅ. संध्या मदन मोहन एवं सहायक प्राध्यापक, डाॅ. रूपम अजीत यादव तथा शासकीय खूबचंद बघेल पीजी काॅलेज, भिलाई की डाॅ. भारती सेठी, शामिल थीं। उक्त सभी कार्यक्रमों में विभिन्न महाविद्यालयों से सैंकड़ों छात्र-छात्राओं तथा प्राध्यापकों ने हिस्सा लिये।

