सीजी न्यूज आनलाईन डेस्क, 13 सितंबर। चार भाई बहनों में तीसरे नंबर के अहद अहमद ने कभी पिता का हाथ बटाने सायकल का पंचर बनाया तो कभी मां के साथ लेडीज कपड़ों की सिलाई की।
बेटे अहद को पढ़ा लिखा कर कामयाब इंसान बनाने का आईडिया उनकी मां अफसाना को फिल्म घर द्वार देखकर आया। इस फिल्म को देखने के बाद ही उन्होंने तय किया कि पति के पंचर की दुकान से परिवार का पेट चलेगा और वह लेडीज़ कपड़ों की सिलाई कर बच्चों को पढ़ाएंगी।

आपको बता दें कि अहद अहमद प्रयागराज के नवाबगंज इलाके के छोटे से गांव बरई हरख के रहने वाले हैं। गांव में उनका छोटा सा टूटा-फूटा मकान है। घर के बगल में ही उनके पिता शहजाद अहमद की साइकिल का पंचर बनाने की छोटी सी दुकान है। इसी दुकान में वह बच्चों के लिए टॉफी व चिप्स भी बेचते हैं। पिता की पंचर की दुकान अब भी चलती है। पिछले कुछ सालों से अहद यहां नियमित तौर पर तो नहीं बैठते लेकिन कभी कभार पिता के काम में हाथ जरूर बटा लेते हैं। पिता ने सिर्फ अहद को ही नहीं पढ़ा बल्कि अपने दूसरे बच्चों को भी तालीम दिलाई। अहद के बड़े भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन चुके हैं तो छोटा भाई एक प्राइवेट बैंक में ब्रांच मैनेजर है। अहद अहमद कुछ साल पहले तक कभी पिता के साथ साइकिल का पंचर बनाते थे तो कभी मां का हाथ बटाते हुए महिलाओं के कपड़े सिलते थे लेकिन अहद अब जज बन चुके हैं। इसी साल 30 अगस्त को यूपी में पीसीएस जे यानी ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की भर्ती के जो नतीजे जारी हुए उसमें अहद अहमद का भी नाम है। अहद को यह कामयाबी पहली ही कोशिश में मिली है, वो भी बिना किसी कोचिंग। अहद की कामयाबी इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि साइकिल का पंक्चर बनाकर परिवार का पेट पालने वाले पिता ने दिन-रात कड़ी मेहनत कर अहद अहमद को ही नहीं बल्कि अपने दूसरे बच्चों को भी तालीम दिलाई। अहद का कहना है कि माता-पिता ने उन्हें न सिर्फ मुफलिसी और संघर्ष में पाल पोसकर इस मुकाम तक पहुंचाया है, बल्कि हमेशा ईमानदारी और नेक नियत से काम करने की नसीहत भी दी है। माता- पिता की इस हिदायत पर वह उम्र भर अमल करने की कोशिश करेंगे।
अहद के मुताबिक उन्हें यह बताने में कतई झिझक नहीं होगी कि वह एक पंचर वाले के बेटे हैं। पिता शहजाद अहमद को वह अब आराम देना चाहते हैं हालांकि जज बनने के बावजूद वह अब भी कभी-कभी पिता का हाथ बंटा लेते हैं।

