– संतोष मिश्रा
सीजी न्यूज आनलाईन डेस्क, 1 जुलाई। किसी भी पैरेंट्स को अच्छा नहीं लगता है कि उनका बच्चा मिट्टी में सना हुआ और गंदे कपड़े लेकर घर आए। बच्चों को मिट्टी, रेत और कीचड़ में खेलना खूब पसंद आता है लेकिन पैरेंट्स जर्म्स और बैक्टीरिया के वजह से अक्सर बच्चों को रोकते-टोकते रहते हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि मिट्टी में खेलने से बच्चा बीमार नहीं होता है बल्कि उसकी इम्यूनिटी मजबूत होती है। ज्यादातर पैरंट्स को लगता है कि कीटाणु हानिकारक होते हैं लेकिन यह सच नहीं है। एक शोध के अनुसार मिट्टी में खेलने से बच्चे मजबूत बनते हैं।
आइए आपको विडियो के माध्यम से एक ऐसे ही कीचड़ में होने वाले महोत्सव में लिए चलते हैं जिसका नाम है “चिखल कालो” जो कि कीचड़ में ही मनाया जा रहा है। गोवा में “चिखल कालो” (कीचड़ स्नान) महोत्सव की धूम मची हुई है।
आपको बता दें कि मार्सेल, भारत के गोवा में स्थित एक आकर्षक गाँव है जो कि अपने आश्चर्यजनक प्राकृतिक दृश्यों, प्रचुर मात्रा में पर्ण समूह और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। मनोरम परिदृश्यों के बीच स्थित, यह गाँव एक शांत अभ्यारण्य के रूप में भी जाना जाता है जो कि शहर की हलचल भरी जिंदगी से शांतिपूर्ण राहत के लिए भी अपनी पहचान बनाए हुए है। अपने छोटे आकार के बावजूद मार्सेल अपने आगंतुकों के लिए एक शांत वातावरण कायम रखते हुए पर्यटकों को पारंपरिक गोवा जीवन शैली की एक मनोरम झलक प्रदान करता है।

इस गाँव के भीतर चिखल कालो नामक एक आकर्षक पारंपरिक उत्सव मनाया जा रहा है जिसको हम आम बोलचाल की भाषा में “कीचड़ स्नान” भी कह सकते हैं। यह उत्सव गोवा के कृषक समुदाय और हम सबका पालन-पोषण करने वाली धरती माता के बीच साझा किए गए गहरे बंधन को व्यक्त करता है।
मार्सल के चिखल कालो महोत्सव को एक परंपरा और संस्कृति के रूप में भी जाना पहचाना जाता है। इस अवसर पर कृषक और पर्यटक सहित गोवा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में डूब सा जाता है क्योंकि कृषक समुदाय और धरती माता के बीच गहरे बंधन का अहसास चिखल कालो करवाता है।

इस दौरान भक्तिपूर्ण उत्सव में देवकी कृष्ण मंदिर में किए जाने वाले मनमोहक अनुष्ठान और समारोह के लोग साक्षी भी बनते हैं और वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिकता और श्रद्धा से भर जाता है। इस त्यौहार के केंद्र बिंदु चिखल कालो से रोमांच की खोज भी होती है। मिट्टी में खेलने की आनंददायक परंपरा में शामिल हो लोग जहां मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं और फिर पूरा मैदान खुशी और उल्लास के खेल में तब्दील हो जाता है।
महोत्सव में गोवा की जीवंत कलाओं और परंपराओं को प्रदर्शित करने वाले मनोरम सांस्कृतिक दृश्यों का आनंद लोग साझा करते हैं तथा मंत्रमुग्ध कर देने वाले लोक नृत्यों से लेकर भावपूर्ण संगीत तक गोवा की संस्कृति की समृद्ध टेपेस्ट्री को मंच पर जीवंत होने का अनुभव मिलता है।
कीचड़ में ही चेंदु फली (क्रिकेट के समान), गिल्ली डंडा सहित खो खो जैसे पारंपरिक खेल होते हैं। महोत्सव का उद्देश्य मिट्टी से जुड़ाल और भाईचारे के साथ सभी समुदाय का मिलन भी है जो इस विशेष उत्सव के लिए मार्सेल गांव जरूर आता है।


