सीजी न्यूज आनलाईन डेस्क, 24 मार्च। प्रायवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले करोड़ों लोगों को एक बड़ा झटका लग सकता है क्योंकि उन्हें पीएफ पर मिलने वाले ब्याज दर को कम किया जा सकता है। पीएफ पर मिलने वाले ब्याज दर को लेकर सरकार फैसला ले सकती है।
खबरों के मुताबिक आशंका जताई जा रही है कि पीएफ पर मिलने वाले ब्याज को और कम किया जा सकता है। अभी कर्मचारियों को पहले से ही पीएफ पर 43 साल में सबसे कम ब्याज मिल रहा है।
आपको बता दें कि देश में अभी ईपीएफ के साढ़े 6 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं। पिछले 43 साल में पीएफ पर मिलने वाले ब्याज की दर सबसे कम है। ईपीएफओ ने साल 2021-22 के लिए पीएफ की ब्याज दर 8.1 प्रतिशत तय की थी, जो कि 1977-78 के बाद पीएफ पर मिलने वाली ब्याज की सबसे कम दर है। इससे पहले 2020-21 में पीएफ पर 8.5% की दर से ब्याज मिल रहा था। वित्तीय वर्ष 2020-21 में पीएफ के ब्याज की दर में कोई बदलाव नहीं किया गया था। वहीं एक साल पहले 2019-20 में ब्याज दर व से घटाकर 8.5% किया गया था।
जानकारी के मुताबिक ईपीएफओ की बैठक 25-26 मार्च को होने वाली है, जिसमें ब्याज के बारे में निर्णय लिया जा सकता है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पीएफ पर ब्याज को और घटाकर 8 फीसदी किया जा सकता है।
प्राप्त खबर के अनुसार इस साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। वहीं अगले साल देश में लोकसभा चुनाव होना है। इस वजह से पीएफ पर मिलने वाले ब्याज को ज्यादा कम करने की गुंजाइश नहीं है लेकिन इसे पिछले साल की तुलना में घटाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों लोगों को सीधे तौर पर घाटा होने वाला है।
गौरतलब हो कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) पीएफ खाताधारकों के खाते में जमा हो वाली रकम को कई जगहों पर निवेश करता है। इस इन्वेस्टमेंट से होने वाली आय के एक हिस्से को ब्याज के रूप में खाताधारकों को रिटर्न दिया जाता है। अभी ईपीएफओ का 85 फीसदी हिस्सा ऑप्शंस में इन्वेस्ट करता है, जिनमें सरकारी सिक्योरिटीज और बॉन्ड भी शामिल हैं। बाकि 15 फीसदी ईपीएफ में लगाया जाता है।

