भिलाई नगर, 18 फरवरी। हर-हर शंभो गीत गाकर देश भर में फेमस हुईं अभिलिप्सा पांडा ने कहा कि सिंगर फरमानी नाज ने यह गीत गाकर इसे और ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उनके गाने के बाद जो कंट्रोवर्सी हुई उसे वह गलत नहीं मानती हैं। उन्होंने कहा कि उनके सनातनी गीत को एक दूसरे धर्म की महिला ने गाया इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। फरमानी नाज के शिव भजन गाने पर कुछ लोगों ने नाराजगी जताई और उसे इस्लाम के खिलाफ बताया था लेकिन ये उनके लिए काफी बड़ी बात है। इस गीत के माध्यम से सनातन धर्म का श्लोक दूसरे धर्म के लोगों ने भी अपनाया है। इससे अच्छी बात और कोई नहीं हो सकती है।
महाशिवरात्रि पर अभिलिप्सा पांडा ओडीसा से अपने पिता के साथ शुक्रवार रात भिलाई पहुंची हैं।
अभिलिप्सा ने कहा कि कोविड जैसी महामारी फिर से कभी न आए, लेकिन उनकी नजर में इसने आज की युवा पीढी को अपने धर्म से जोड़ने का काम किया है। कोविड के दौरान लोग अपने घर में थे, भारत सरकार ने सालों पहले आने वाले सीरियल महाभारत, रामायण, विष्णु पुराण और अन्य धार्मिक प्रोग्राम टीवी पर दिखाना शुरू किया। लोगों ने उसे देखा। युवा पीढ़ी जो रामायण, महाभारत के पात्रों को जानती नहीं थी, उनको न सिर्फ जाना बल्कि उनके बारे में पढ़ा और समझा भी। इससे लोगों को अपने कल्चर की बेसिक नॉलेज मिला, अपने धर्म के प्रति रुझान जागा । इस नजर से कोविड को वो अच्छा मानती हैं।

अभिलिप्सा ने कहा कि वो आयरन सिटी ओडिशा से हैं और भिलाई स्टील सिटी है। यहां वो पहली बार आई हैं। उन्हें यहां आकर काफी अच्छा लगा। सबसे बड़ी सौभाग्य की बात ये है कि वो महा शिवरात्रि के महा पर्व पर यहां आई हैं और श्री 108 लिंगीय महारुद्राभिषेक कार्यक्रम का हिस्सा बन रही हैं। उन्होंने कहा कि कभी नहीं सोचा था कि वो सिंगर बनेंगी। वो बचपन में टीचर बनना चाहती थीं। साइंटिस्ट बनना चाहती थीं लेकिन सिंगर बनने का सपना उनका कभी नहीं रहा। अब उनका सपना है कि वो बायोलॉजिस्ट बने। इसके लिए वो पढ़ाई भी कर रही हैं। वो जीवन में कभी भी संगीत से दूर नहीं रह पाएंगी। उनका गायन लगातार जारी रहेगा क्योंकि म्यूजिक हो, आर्ट या कल्चर का कोई भी फार्म हो ये एक महक की तरह होता है, जैसे महक को एक डिब्बे में बंद करके नहीं रखा जा सकता है उसी तरह इसे भी दबा कर नहीं रख सकते हैं इसलिए यदि वो बायोलॉजिस्ट बन भी गईं तो कल्चरर फील्ड का काम जारी रहेगा।

