सीजी न्यूज आनलाईन डेस्क, 14 फरवरी। आजकल हम अक्सर सुना करते हैं कि “रूपया भगवान तो नहीं पर भगवान से कम भी नहीं” वहीं एक समूह ऐसा भी है जो रूपये को हाथ का मैल समझता रहा है, अधिकांश लोगों के लिए रूपये से बढ़ कर कुछ नहीं, वे कहते भी हैं कि रूपया है तो सबकुछ है, कुछेक लोग ही ऐसे हैं जो धन दौलत की जगह मानसिक शांति को तवज्जो देते हैं। ऐसे ऊहापोह भरे विचारों के बीच हम ऐसी खबर लाए हैं जिसे पढ़ और जान कर आप यह भी मनन चिंतन जरूर करेंगे कि हो न हो आखिर में धन दौलत से किनारा कर भगवान की शरण ले लेना भी बहुत जरूरी भी है।
आपको बता दें कि सम्पन्न प्रदेश गुजरात के कच्छ जिले में कपड़े का व्यवसाय करने वाले जाने माने व्यापारी और उनके परिवार ने तमाम सुख सुविधाओं का त्याग कर संन्यास ले लिया है। इस परिवार ने अपनी करोड़ों की संपत्ति दान कर दी और नियमों का पालन कर बाकायदा दीक्षा ले संन्यासी जीवन की राह पर चल पड़ें हैं। भुज के इस जैन परिवार के चार लोगों ने दीक्षा लेकर ईश्वर के बताए मार्ग और जीवन की राह पकड़ ली है। इससे पहले अपना घर, व्यवसाय और तमाम ऐश ओ आराम का परित्याग करते हुए इस परिवार ने अपनी करोड़ों की संपत्ति दान कर दी और संयम का मार्ग अपना लिया।
गौरतलब हो कि गुजरात में इससे पहले भी कई लोगों ने इसी तरह सुख-सुविधाओं का परित्याग कर संन्यास की राह पर चलने का फैसला किया हुआ है। अजरामर संप्रदाय के छह कोटि स्थानकवासी जैन संघ और वागड़ के दो चोविसी जैन समाज के एक परिवार के सभी सदस्यों ने जैन समुदाय के भगवती दीक्षा प्राप्त करने वाले पहले थे। भुज की ही पूर्वी बेन मेहता ने अपने संप्रदाय की गुरु मैया के आशीर्वाद से दीक्षा लेने का फैसला किया। उनका यह संन्यासी जीवन देखकर घर के अन्य सदस्य उनसे प्रभावित हुए और उनके पति पीयूष मेहता और दंपति के साथ 11वीं और 12वीं कॉमर्स में पढ़ रहे बेटे मेघकुमार और भांजे कृष भी संन्यास के रास्ते पर चलने का फैसला किया।
विदित हो कि जैन समाज की भागवती दीक्षा बहुत कठिन मानी जाती है। इसमें पांच महाव्रतों का पालन, ब्रह्मचर्य, अचौर्य और पैदल यात्रा करनी होती है इसलिए तपस्वियों को जीवन भर बिना बिजली उपकरण का उपयोग किए, बिना रुपयों के कठोर तपस्या की राह पर चलना पड़ता है। तपस्या के इस मार्ग पर चलने से पहले तपस्वियों को अपनी पूरी संपत्ति दान करनी पड़ती है। दीक्षार्थी पीयूष भाई भुज में ही कपड़े का होलसेल बिजनेस चला रहे थे। सालाना करीब एक करोड़ रुपए का कारोबार करने वाले पीयूष भाई और उनके परिवार ने अपनी करोड़ों की संपत्ति का परित्याग कर दिया और सांसारिक सुखों को त्याग कर संयम का मार्ग अपना लिया है।
करोड़ों की संपत्ति दी “दान” 🟩 पूरे परिवार ने अपनाया संन्यासी जीवन 🟫 कामर्स छात्र मेघ और कृष भी कठिन तपस्वी बनने की राह पर

