सीजी न्यूज आनलाईन डेस्क, 4 फरवरी। गौतम अडाणी मामले पर आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नियामक अपना काम कर रहे हैं। सेबी को सरकार ने स्वतंत्र छोड़ दिया है ताकि वो इस मामले की सही से जांच कर सके।
वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों और LIC ने RBI को अडाणी समूह को लेकर अपने एक्सपोजर के बारे में बताया है। अडाणी के FPO वापस लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि FPO आते हैं और बाहर निकल जाते हैं। देश में कई बार FPO वापस लिए गए हैं, और इससे भारत की छवि पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उतार-चढ़ाव हर बाजार में होते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि तथ्य यह है कि पिछले 2 दिनों में हमारे पास विदेशी मुद्रा भंडार 8 बिलियन डॉलर आया है। यह साबित करता है कि भारत और इसकी ताकत के बारे में धारणा बरकरार है। देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत और स्थिर इससे पहले RBI ने शुक्रवार को कहा था कि देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत और स्थिर है। RBI ने कहा कि वह लगातार बैंकिंग सिस्टम की निगरानी कर रहा है। RBI ने कहा कि उसके पास बड़े कर्जों से संबंधित सूचनाओं का केंद्रीय संग्रह (CRILC) डेटाबेस प्रणाली है, जहां बैंक अपने 5 करोड़ और इससे अधिक के कर्ज की जानकारी देते हैं। इस जानकारी का इस्तेमाल निगरानी के लिए किया जाता है। हालांकि RBI ने अपने बयान में अडाणी ग्रुप का नाम नहीं लिया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कहा कि बैंकों और बीमाकर्ताओं का जोखिम “तय लिमिट” के अंदर था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने को कहा कि LIC और SBI दोनों ने ही अडाणी ग्रुप के लिए कुछ स्पेशल व किसी सीमा से बाहर नहीं किया है। LIC और SBI ने अडाणी के लिए अपने जोखिम पर विस्तृत बयान जारी किया है। LIC और SBI ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनका जोखिम ‘तय सीमा के भीतर है’ और वे मुनाफे में ही हैं। अडाणी ग्रुप में SBI और LIC का पैसा लगाने के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष इसकी जांच जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (IPC) या सुप्रीम कोर्ट के पैनल से कराने की मांग कर रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश का शेयर मार्केट नियमों के मुताबिक चल रहा है। अडाणी के बिजनेस विवाद की वजह से निवेशकों का भरोसा डगमगाने की आशंका नहीं है।
आपको बता दें कि विपक्ष का आरोप है कि सरकारी बैंक SBI ने अडाणी ग्रुप को 21.38 हजार करोड़ रुपए का लोन दिया है। वहीं, फाइनेंस और इंश्योरेंस कंपनी LIC ने पिछले कुछ साल में अडाणी ग्रुप में 30,127 करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट किया है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने से पहले LIC का ग्रुप के शेयरों से प्रॉफिट 81,000 करोड़ रुपए था, जो 2 फरवरी को 43,000 करोड़ रुपए रह गया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि शेयर बाजार का यह अमृतकाल का सबसे बड़ा महाघोटाला है। दिसंबर 2022 तक LIC के पास अडाणी ग्रुप में करीब 1% (0.975%) हिस्सेदारी है। बीते 6 ट्रेडिंग सेशन में LIC का अडाणी ग्रुप में इन्वेस्टमेंट लगभग आधा रह गया है। विपक्ष का कहना है कि लोगों की मेहनत का पैसा बर्बाद हो रहा है। लोगों का विश्वास SBI और LIC से उठ जाएगा। 24 जनवरी की शाम को हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने से पहले अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयर की कीमत 3400 रुपए के करीब थी। शुक्रवार को यह करीब एक हजार रुपए तक नीचे आ गया और फिर रिकवर होकर 1,531 रुपए पर बंद हुआ।
अडाणी मामले में LIC और SBI का RISK तय सीमा के भीतर है 🟩 बैंकों और बीमाकर्ताओं का जोखिम “FIX LIMIT” के दायरे में-निर्मला सीतारमण

