भिलाई नगर 20 जनवरी बालोद जिले के फागुनदाह के रहने वाले छबि आनंद साहू के गांव में न ही कोई डॉक्टर है और न ही कोई अस्पताल। इसलिए पिता चाहते थे कि बेटा बड़ा होकर डॉक्टर बने। बेटे ने भी पिता के सपने का मान रखा और तीन साल कड़ी मेहनत करके मेडिकल कॉलेज की सीट हासिल करने में सफल रहा। अपने पिता से मिले प्रेरणा को याद करते हुए छबि ने बताया कि एक वक्त ऐसा भी था कि मुझे सबसे ज्यादा लैंग्वेज प्राब्लम होती थी। गांव के हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़ाई होने के कारण नीट की तैयारी के दौरान सब्जेक्ट ही समझ नहीं आता था। एनसीईआरटी का सिलेबस भी काफी कुछ अंग्रेजी में है। ऐसे में चीजें समझने के बाद भी मैं उसे ठीक तरह से पढ़ नहीं पाता था। ऐसे में अपनी कमजोरी को दूर करने के लिए कड़ी मेहनत की। मैं जानता था कि अगर जीवन में आगे बढऩा है तो पढ़ाई ही एक मात्र जरिया है। इसलिए दिन रात एक करके सिर्फ पढ़ाई पर फोकस किया। जिसका नतीजा सकारात्मक रहा। अपनी जर्नी से मैंने सिर्फ एक ही बात सीखी है कि मेहनत कभी जाया नहीं जाता। हर मेहनत करने वाले को फल जरूर मिलता है।
पहले ड्राप में नहीं कर पाया टाइम मैनेज
छबि ने बताया कि 12 वीं तक की पढ़ाई गांव के स्कूल से की थी। जब नीट की तैयारी शुरू की तो समझ ही नहीं आ रहा था कि कहां से पढ़ाई शुरू करूं। पहले एक महीने तक तो सिर्फ कोचिंग जाता था और कोचिंग से आकर किताबों में उस चेप्टर को ढूंढता था। धीरे-धीरे शॉर्ट नोट्स बनाकर मैंने किसी तरह हिम्मत जुटाकर पढ़ाई शुरू की। पहले ड्रॉप में एग्जाम से ठीक पहले रिविजन भी नहीं कर पाया। जब पेपर साल्व करना शुरू किया तो टाइम मैनेजमेंट भी नहीं कर पाया। किसी तरह तीन घंटे में आधे ही क्योश्च्यन साल्व कर पाया था। दूसरे ड्रॉप में मैंने पुरानी गलतियों को नहीं दोहराया और अच्छे से तैयारी की। माक्र्स भी अच्छे आए लेकिन कटअफ काफी हाई जाने के कारण मेडिकल कॉलेज की सीट नहीं मिली। थोड़े नंबरों से चूक जाने के लिए कई दिनों तक निराश रहा। घर वालों ने कहा कि जब दो साल दे दिया तो एक और साल मेहनत करो। इसलिए तीसरा ड्रॉप लेकर कड़ी मेहनत की और इस साल सलेक्शन हो गया।
सचदेवा में सीखा नोट्स बनाना
छबि आनंद ने बताया कि 12 वीं के बाद सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज नीट की कोचिंग के लिए ज्वाइन किया। उस वक्त कुछ भी नहीं पता था। सचदेवा में जाकर ही बेस बना। यहां के टीचर्स बहुत ज्यादा अनुभवी हैं। मैं कोचिंग में जो पढ़कर आता उसका शॉर्ट नोट्स बनाता। कई बार सचदेवा के टीचर्स भी शॉर्ट नोटï्स बनाने के लिए गाइड करते थे। हिंदी मीडियम स्टूडेंट्स की लैंग्वेज प्राब्लम को समझकर यहां टीचर्स लैंग्वेज पर भी फोकस करते हैं। यहां का माहौल बहुत ही पॉजिटिव है। सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की काउंसलिंग क्लास भी बहुत अच्छी है। कई बार तो जैन सर बच्चों की पर्सनल काउंसलिंग भी करते हैं। यहां बेसिक से पढ़ाई कराई जाती है जो आगे चलकर काफी काम आता है। हर सप्ताह टेस्ट भी लिया जाता है।
रिविजन जरूर करें
नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहना चाहता हूं कि आप रिविजन के लिए जरूर टाइम निकाले। बिना रिविजन के मेन एग्जाम दिया तो कन्फ्यूजन होता है। इसी तरह शॉर्ट नोट्स भी जरूर बनाएं। सबसे महत्वपूर्ण बात निराशा के दौर से निकलने के लिए अपनों का सहारा लें। कोशिश करें मोबाइल में ज्यादा टाइम वेस्ट न करें ।

