भिलाई नगर 19 जनवरी । आठवीं पास किसान पिता का सपना था कि घर में कोई एक डॉक्टर होना चाहिए। वे खुद आर्थिक परिस्थिति खराब होने के कारण ठीक से पढ़ नहीं पाए लेकिन फैसला किया कि चाहे कुछ भी हो जाए बेटे को डॉक्टर जरूर बनाएंगे। यहीं से एक पिता के सपने को बेटे फिरेंद्र ने भी गले से लगा लिया और कूद गए कॉम्पिटिशन की दौड़ में। साल दर साल मिलती असफलताओं के साथ पैसे की तंगी ने भी फिरेंद्र की खूब परीक्षा ली। पर कहते हैं कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती। कुछ ऐसा ही हुआ सारंगगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छोटे से गांव पौवनी के रहने वाले फिरेंद्र साहू के साथ। 12 वीं के बाद नीट की तैयारी करते हुए फिरेंद्र ने न सिर्फ अपनी पढ़ाई की बल्कि ड्रॉपर बैच को कोचिंग पढ़ाते हुए खुद अपने खर्च की जिम्मेदारी भी उठाई। कड़ी मेहनत और लगन की बदौलत तीन साल के ड्रॉप के बाद आखिरकार नीट क्वालिफाई करने में सफल रहे। चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिलते ही फिरेंद्र के पिता खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। गांव के पहले डॉक्टर बनने के साथ उनके परिवार की खुशियां और दोगुनी हो गई है। फिरेंद्र कहते हैं कि अगर सही तरीके से मेहनत की जाए तो एक न एक दिन सफलता जरूर मिलती है बस जरूरत है थोड़े धैर्य की।
12 वीं के बाद कोचिंग में जाकर पता चला कौन सी परीक्षा देनी है
फिरेंद्र ने बताया कि हिंदी मीडियम और गांव से पढ़ाई होने के कारण मुझे मेडिकल एंट्रेस की ज्यादा जानकारी नहीं थी। बस इतना पता था कि नीट नाम की कोई परीक्षा होती है जिसे पास करने के बाद ही डॉक्टर बनते हैं। किसी तरह परिवार ने पैसे जुटाकर मुझे कोचिंग के लिए भेजा तब यहां आकर पता चला कि नीट आखिर होता क्या है। शुरुआत के दिन तो काफी मुश्किल भरे रहे। कुछ भी समझ नहीं आता था। लगता था कि सबकुछ नया है। स्कूल में मैंने कुछ पढ़ा ही नहीं ऐसा ख्याल बार-बार मन में आता था। कोचिंग में आकर पता चला कि अगर बेसिक ठीक से नहीं पढ़ा तो आगे कुछ नहीं हो पाएगा। इसलिए जीरो से शुरूआत करके पढ़ाई शुरू की। पहला ड्रॉप सिर्फ बेसिक स्ट्रांग करने में निकल गया। दूसरे ड्रॉप में तैयारी करके उतरा तो असफलता मिली। इसलिए मैंने बीएएमएस में एडमिशन ले लिया। यहां पढ़ाई करते हुए मैंने ड्रॉपर बैच को कोचिंग पढ़ाना शुरू किया। साथ-साथ नीट की तैयारी भी करता रहा। तीसरे ड्रॉप में आखिरकार सफलता मिली।
सचदेवा मे में जाकर बना बैक बोन
नीट की तैयारी सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज से करने वाले फिरेंद्र ने बताया कि मेरी स्टडी का बैक बोन सचदेवा में पढ़कर बना। यहीं से मेरा बेसिक स्ट्रांग हुआ। सेल्फ स्टडी करते हुए मैंने यहां के टीचर्स के नोट्स ही पढ़े। साथ ही साथ यहां का टेस्ट सीरिज भी दिया जो काफी काम आया। सचदेवा में पढ़ाई का माहौल बहुत अच्छा है। यहां की सबसे अच्छी बात ये है कि यहां सबकुछ जीरो से शुरू किया जाता है। आपने पहले क्या पढ़ा, क्या नहीं उसे जानने की बजाय सभी छात्रों को शुरूआत से पढ़ाया जाता है ताकि कमजोर छात्र भी कॉम्पिटिशिन में बने रहे। यहां के टीचर्स के पढ़ाने का तरीका भी काफी अच्छा है। डिप्रेशन और निराशा के दौर में यहां के टीचर्स और स्टाफ एक फैमिली मेंबर की तरह आपका मार्गदर्शन करते हैं। सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की काउंसलिंग तो बहुत अच्छी है। अलग-अलग एक्सांपल देकर स्टूडेंट्स को मोटिवेट करते हैं। ये सारी बातें सचदेवा को सबसे अलग बनाती है।
मेहनत करो हर सपना पूरा होगा
नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहना चाहता हूं कि आप सिर्फ मेहनत करो आपका हर सपना पूरा होगा। अगर आप सोचते रहेंगे तो कुछ नहीं होगा। एनसीईआरटी की किताबों को शुरू से पढऩा चाहिए। आज कल आधे से ज्यादा सवाल वहीं से आते हैं। अपने आप पर भरोसा करें तभी सफलता मिलेगी।


