नवबोध, प्रबोध पढ़कर बोर्ड एग्जाम दिया जब नीट की बारी आई तो सिलेबस देखकर चकरा गया सिर, तीसरे ड्रॉप में जीरो से करनी पड़ी तैयारी, नतीजा अब बनेगी डॉक्टर

नवबोध, प्रबोध पढ़कर बोर्ड एग्जाम दिया जब नीट की बारी आई तो सिलेबस देखकर चकरा गया सिर, तीसरे ड्रॉप में जीरो से करनी पड़ी तैयारी, नतीजा अब बनेगी डॉक्टर


भिलाई नगर 12 जनवरी । सूरजपुर जिले के चंदूरी गांव की रहने वाली निशा सिंह ने बचपन में ही तय कर लिया था कि वो बड़ी होकर डॉक्टर बनेगी। पैरेंट्स का भी सपना था कि बेटी डॉक्टर बनकर घर-परिवार का नाम रोशन करे। इसलिए कोचिंग के लिए निशा को भिलाई भेज दिया। 12 वीं बोर्ड के बाद जब निशा ने तैयारी शुरू की तो नीट का सिलेबस देखकर उसका सिर चकरा गया। स्कूल में नवबोध-प्रबोध पढ़कर अच्छे नंबर तो ला लिया लेकिन यहां एनसीईआरटी की किताबें देखकर कुछ भी समझ नहीं आता था। निशा ने बताया कि एक पल के लिए लगा कि सारे सपने टूट जाएंगे। पता नहीं मैं नीट क्लीयर कर भी पाऊंगी या नहीं ये सवाल दिनभर दिमाग में घूमते रहता था। कुछ महीने बीतने के बाद थोड़ा खुद को संभाला और तैयारी शुरू की। अगले साल कोविड ने दस्तक देकर सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कोचिंग से लेकर पढ़ाई तक सब पर बहुत बुरा असर पड़ा। जो पढ़ा था वो भी भूल गई। फाइनली खुद को तीसरा चांस दिया इस बार मन लगाकर पढ़ाई की और सफलता हाथ लगी। महासमुंद मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेने वाली निशा कहती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हो आपको मेहनत करते रहना चाहिए।

होती थी होम सीकनेस, डीपली पढऩे में हुई दिक्कत


निशा ने बताया कि जब पहली बार कोचिंग के लिए आई तो बहुत ज्यादा होम सीकनेस होती थी। डीपली पढऩे में भी दिक्कत होती थी। फिजिक्स बहुत ज्यादा टफ लगता था। ऐसा ही कुछ हाल बाकी दोनों सब्जेक्ट का भी था। कोचिंग में टीचर्स ने हौसला दिया। अपने ही तरह हजारों बच्चों को कड़ी मेहनत करते हुए देखकर प्रेरणा मिली। धीरे-धीरे ही सही सिलेबस को समझना शुरू किया। पहला ड्रॉप सिर्फ बेसिक स्ट्रांग करने और एग्जाम के पैटर्न को जानने में निकल गया। दूसरे साल कोरोना आ गया। जब एग्जाम दिया तो ओएमआर सीट में बड़ी गलती कर दी। जिसके कारण रही सही उम्मीद भी टूट गई। तीसरे साल मैंने बीएससी ज्वाइन कर लिया। साथ-साथ नीट की तैयारी की। इस बार सबकुछ दाव पर लगा था। घर वालों ने भी बोल दिया था कि ये आखिरी मौका है। इसलिए मैं चूकना नहीं चाहती थी। इसलिए पूरी तैयारी के साथ एग्जाम दिया और फाइनली नीट क्वालिफाई कर लिया।

सचदेवा में पढ़ाई बहुत अच्छी होती है..


नीट की तैयारी सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज से करने वाली निशा ने बताया कि 12 वीं के बाद सिर्फ एग्जाम के बारे में मुझे जानकारी थी। क्या पढऩा है, कैसे पढऩा है ये सब सचदेवा में जाकर पता चला। यहां पढ़ाई बहुत ही अच्छी होती है। यहां के टीचर्स अलग-अलग ट्रिक्स से बच्चों को इजी वे में पढ़ाते हैं। सबसे अच्छी बात है कि चाहे जितने भी बार हो आप अपना डाउट पूछ सकते हैं। डाउट क्लीयर करने के लिए अलग से डाउट क्लास भी लगाया जाता है। यहां का माहौल भी अच्छा है। टेस्ट सीरिज में एक तरह से मेन एग्जाम की तैयारी हो जाती है। सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर बहुत अच्छी तरह से बच्चों की काउंसलिंग करते हैं। हर तरह का मेंटल सपोर्ट भी देते हैं। साथ ही हेल्दी टिप्स भी देते हैं।

नोट्स बनाकर पढ़े


नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहना चाहती हूं कि आप जो भी पढ़े उसका नोट्स जरूर बनाए। ड्रॉप इयर में ये नोट्स बहुत काम आता है। डाउट पूछने में कभी भी नहीं हिचकना चाहिए। पुराने पेपर जरूर साल्व करें इससे कॉन्फिडेंस बढ़ता है।