रैंक आने के बाद भी नहीं मिला मेडिकल कॉलेज, निराश होकर ज्वाइन कर लिया बीएएमएस, सहपाठियों को बीएमएस साथ नीट की तैयारी करते देख मिली प्रेरणा, 6 महीने में सेल्फ स्टडी से मिली सफलता

रैंक आने के बाद भी नहीं मिला मेडिकल कॉलेज, निराश होकर ज्वाइन कर लिया बीएएमएस, सहपाठियों को बीएमएस साथ नीट की तैयारी करते देख मिली प्रेरणा, 6 महीने में सेल्फ स्टडी से मिली सफलता


भिलाई नगर 31 दिसंबर । महासमुंद की रहने वाली रेणुका सवई अपनी बड़ी दीदी को एमबीबीएस की पढ़ाई करते अक्सर देखती थी, तभी से मन में डॉक्टर बनने का सपने सजाने लगी थी। इसी सपने को पूरा करने के लिए उसने 12 वीं बोर्ड के बाद ड्रॉप लेकर तैयारी शुरू की। स्कूल की पढ़ाई और नीट के सिलेबस में अंतर के चलते पहला साल तो उसे चीजों को समझने में निकल गया। जब दूसरे साल पूरी तैयारी के साथ उतरी तो रैंक आ गया, लेकिन मेडिकल कॉलेज की सीट नहीं मिलने से उसके अरमानों पर पानी फिर गया। अपने सपने के इतने करीब पहुंचकर टूटते देख रेणुका काफी निराश हो गई और उसने बीएएमएस में एडमिशन ले लिया। जब क्लास जाना शुरू किया तो यहां ज्यादातर दोस्त और स्टूडेंट एमबीबीएस की तैयारी करते नजर आए। इसलिए तीसरे साल रेणुका ने बीएएमएस के साथ नीट की तैयारी शुरू की और महज 6 महीने के सेल्फ स्टडी से नीट क्वालिफाई कर लिया। चार बहनों वाले परिवार में अब बड़ी बहन के बाद रेणुका भी घर की दूसरी डॉक्टर बनेगी। महासमुंद मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेकर उसने अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ा दिया है। रेणुका कहती है गिरकर उठना और उठकर खड़े होना यही प्रकृति का नियम है। अगर इंसान इस नियम को पूरी इच्छा शक्ति के साथ फॉलो करे तो सक्सेस होने से कोई रोक नहीं सकता।

एग्जाम प्रेशर में बिगाड़ लिया पेपर
सीजी बोर्ड, हिंदी मीडियम से 12 वीं तक की पढ़ाई करने वाली रेणुका ने बताया कि जब मैंने पहली बार नीट का एग्जाम दिया तो एग्जाम प्रेशर के चलते अपना पेपर ही बिगाड़ लिया। कई प्रश्न आते थे लेकिन प्रेशर के चलते उसका सही जवाब तक नहीं दे पाई थी। स्कूल और नीट के सिलेबस में बहुत अंतर होता है। इसलिए मैंने जीरो से शुरुआत की। सबसे पहला काम अपने बेसिक को स्ट्रांग किया। फिजिक्स मुझे शुरू से बहुत ज्यादा टफ लगता था। फिजिक्स का स्ट्रांग करने के लिए पहले उसके इजी पाटर््स की तैयारी की फिर टफ पाटïर््स पर मेहनत किया। नीट में तीनों मेन सब्जेक्ट फिजिक्स, कैमेस्ट्री और बायो रहता है। इसलिए तीनों की तैयारी के दौरान मैंने तीनों को ही इक्वल समय दिया। ताकि कोई भी सब्जेक्ट के स्कोरिंग में दिक्कत न हो। हर किसी की शुरूआत कठिन होती है लेकिन जब आप मेहनत करते जाते हैं तो दिन और समय के साथ चीजें आसान होती चली जाती है। अपने आपको मोटिवेट रखना भी बहुत जरूरी है। तीन साल ड्रॉप के दौरान डिप्रेशन भी होता था लेकिन मुझे यकीन था कि मैं नीट क्वालिफाई कर लूंगी।

स्मार्ट स्टडी करना सीखा सचदेवा में
नीट की कोचिंग सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज से करने वाली रेणुका ने बताया कि उसने स्मार्ट स्टडी करना सचदेवा से ही सीखा। सचदेवा में सिलेबस को कई पाटर््स में बांटकर कम समय में ट्रिक को एप्लाई करना सिखाया जाता है। जो मेन एग्जाम में बहुत काम आता है। इसके अलावा यहां के टीचर्स और स्टाफ बहुत ही पॉजिटिव है। टीचर्स से आप चाहे जितनी बार अपना डाउट पूछ सकते हैं। क्लास के बाद भी पूरी मदद करते हैं। सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर से मिलकर तो अपने आप ही पॉजिटिविटी आ जाती है। उनके मोटिवेशन वीडियो और मोटिवेशनल काउंसलिंग से काफी मदद मिलती है। ओवर ऑल यहां का माहौल बहुत अच्छा है। टेस्ट सीरिज के दौरान मेन एग्जाम के लिए टाइम मैनेजमेंट की पै्रक्टिस भी हो जाती है।

जीरो से करें शुरुआत
नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स से कहना चाहती हूं कि आप जब भी शुरुआत करें जीरो से करें। आप ये भूल जाइए कि आपको क्या आता है, क्या नहीं। बस दिमाग में यही बात रखना है कि मुझे बेसिक से सबकुछ पढऩा है। तभी डीप नॉलेज से आप चार में से एक सही ऑप्शन पर टिक मार्क कर पाएंगे। टाइम मैनेजमेंट के लिए पुराने एग्जाम पेपर जरूर साल्व करें। इससे किस पार्ट को कितना समय देना है, कैसे साल्व करना है इसकी जानकारी मिलती है।