भिलाई नगर, 15 अक्टूबर। छत्तीसगढ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देश पर देश की प्रथम राज्य स्तरीय वृहद जेल लोक अदालत का शुभारंभ वर्चुअल माध्यम से केन्द्रीय जेल रायपुर से न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी ने किया गया। जिसमें सभी जिलों के न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं जेल के कर्मचारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। वृहद जेल लोक अदालत का आयोजन केन्द्रीय जेल दुर्ग में किया गया। दीप प्रज्जवलन कार्यक्रम में संजय कुमार जायसवाल जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग, आनंद प्रकाश वारियाल सदस्य सचिव, पुष्पेन्द्र मीणा कलेक्टर, डॉ. अभिषेक पल्लव पुलिस अधीक्षक, योगेश क्षत्री जेल अधीक्षक दुर्ग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में संजय कुमार जायसवाल जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के लिये यह गर्व का विषय है कि छोटे अपराधों में जेल में निरूद्ध बंदियों के प्रकरणों को निराकृत किया जा रहा है। जेल लोक अदालत के माध्यम से जो बंदी रिहा होंगे वे अपने परिवारजनों के साथ त्यौहार मना सकेंगे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सामाजिक मामलों में जागरूकता पैदा करना, कमजोर व पिछडे वर्गों की सहायता करना है।
न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी ने कहा कि छोटे-छोटे अपराध में जो बंदी निरूद्ध है तथा जो विचाराधीन बंदी के रूप में निरूद्ध हैं तथा आधी सजा भुगत चुके हैं एवं जिसका आचरण व्यवहार अच्छा है, लोक अदालत के प्रकरणों का निराकरण आज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायालय आपके द्वार इसी कड़ी में यह पहला कदम राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बढ़ाया गया है। बंदी ये न समझें कि जेल में रहना ही उनका भविष्य है। बंदी अपने दिमाग में सकारात्मक सोच रखें। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के सदस्य सचिव आनंद प्रकाश वारियाल ने कहा कि बंदी अपनी अंर्तआत्मा की आवाज सुने और यह निर्णय लें कि जो अपराध वे कर रहें हैं, वे सही है या नहीं। बंदी जो अपराध करता है उसका खामियाजा उसके परिवारजन भी भुगतते हैं। साथ ही प्रियजन की रिहाई के लिये अधिवक्ताओं व न्यायालय के चक्कर लगाते फिरते हैं। विधिक सेवा प्राधिकरण आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों एवं बंदियों के लिये निःशुल्क विधिक सहायता, जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय स्तर पर उपलब्ध कराता है।
एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव बंदियों के मनोबल को बढाते हुए उन्हें अपराध की पुनरावृत्ति न करने की सलाह दी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार वर्मा ने जेल से बाहर निकलने के लिए विधिक उपचार बताया। मंच संचालन न्यायिक मजिस्ट्रेट उमेश कुमार उपाध्याय ने किया। केन्द्रीय जेल दुर्ग में वृहद जेल लोक अदालत हेतु 6 खंडपीठ का गठन किया गया जिसमें न्यायिक मजिस्ट्रेट, पीठासीन अधिकारी के रूप में उपस्थित हुए। जेल लोक अदालत में कुल 17 प्रकरण निराकृत हुए।

