देवर या ननद के पति से पहले हलाला फिर घर में एंट्री, ऐसे कड़वे घूंट से जूझ रही तसीमा के मुंह से निकले विरोध के स्वर, जानिए पूरा मामला……

देवर या ननद के पति से पहले हलाला फिर घर में एंट्री, ऐसे कड़वे घूंट से जूझ रही तसीमा के मुंह से निकले विरोध के स्वर, जानिए पूरा मामला……



बिहार, 3 सितंबर। मुजफ्फरपुर में देवर या ननदोई से हलाला के बाद ही घर में एंट्री मिलने के कड़वे फ़रमान का घूंट पिछले डेढ़ साल से मुजफ्फरपुर की तसीमा खातून गटकते हुए अपने हक के लिए जूझ रही है। ससुराल पक्ष ने शर्त रखी है कि निकाह हलाला होगा, फिर उसे अपने पति से असली शादी करनी होगी तब कहीं जाकर घर में रहने दिया जाएगा। तसीमा की आत्मा इस बात की गवाही नहीं दे रही है। उसे लगता है कि वो अपने देवर या ननदोई के साथ पहले निकाह फिर शारीरिक संबंध और फिर तलाक क्यों ले? उसे तो सिर्फ अपने बेटे के साथ ससुराल में रहना है आखिर एक बेटी कब तक अपने मायके में रहेगी? जबकि ससुराल में संपन्नता है, उसके पति का बिजनेस है, उसके पति के कमाए पैसे से जब पूरा परिवार रह सकता है तो वो अपने औलाद को लेकर क्यों नहीं रह सकती?
गौरतलब हो कि इस्लाम में औरत को तीन तलाक देने के बाद दोबारा उसी महिला से विवाह करने की प्रक्रिया को निकाह हलाला कहा जाता है। मगर ये उतना आसान नहीं हैं, जितना की पढ़ने में लग रहा है। शरिया के मुताबिक अगर किसी पुरुष ने औरत को तीन तलाक दे दिया है तो उसने उस औरत का अपमान किया है। अब वो शख्स उस औरत से दोबारा तब तक शादी नहीं कर सकता, जब तक वो औरत किसी दूसरे पुरुष से निकाह कर तलाक न ले ले। वैसे महिला के दूसरे पति को तलाक देने पर मजबूर नहीं किया जा सकता। वो चाहे तो पति-पत्नी की तरह रह सकते हैं, मगर निकाह हलाला के लिए तलाकशुदा महिला को किसी दूसरे पुरुष से शादी करनी होती है। उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना होता है फिर दूसरे पति से तलाक लेना होता है। तब जाकर पहले पति के साथ फिर से निकाह होता है। इस पूरे प्रॉसेस को निकाह हलाला कहते हैं। आम बोलचाल में इसे हलाला भी कहा जाता है।
मुजफ्फरपुर के सकरा में तीन तलाक के बाद सवा साल से हलाला के लिए एक महिला पर दबाव बनाया जा रहा है। ससुराल पक्ष का दबाव है कि देवर या ननदोई से हलाला के बाद ही उसका उसके पति फिर से निकाह होगा, जिसके बाद वो ससुराल में रहने लायक होगी। हलाला से इंकार कर रही महिला 21 अगस्त को ससुराल में रहने के लिए पहुंची तो उसके साथ मारपीट की गई। इसके बाद सकरा थाने में 26 अगस्त 2022 को एफआईआर दर्ज कराई। मानवाधिकार के पास भी आवेदन देकर गुहार लगाई फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। जिस पंचायत में तसीमा खातून को तीन तलाक दिया गया था, उसमें शामिल लोगों का बयान लिया जाएगा फिलहाल, उसका पति कोलकाता में है, वहां वो व्यवसाय करता है। दर्ज मामले मे ससुर, सास, ननद और देवर को आरोपी बनाया है। ससुर पर गलत नजर रखने का भी आरोप है।
मिली जानकारी के मुताबिक निकाह के बाद तसीमा ससुराल में ठीक से रह रही थी। इसी दौरान एक बेटा भी हुआ। हंसी-खुशी जिंदगी कटने लगी। तसीमा को लगा कि उसे जीने का सहारा मिल गया। इसके बाद पति ने 10 लाख रुपए और पांच भर (तोला) सोना की डिमांड रखी। नहीं देने पर प्रताड़ना का दौर शुरू हुआ। सास, ससुर, ननद और देवर भी दहेज के लिए आतुर थे। दहेज के लिए डेढ़ साल पहले मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया गया। तब अप्रैल 2021 में तसीमा के पिता ने ससुराल में पंचायत रखी। इसी पंचायत में पति ने तीन तलाक दे दिया। अब ससुराल वालों की शर्त है कि अगर ससुराल में रहना है तो हलाला से गुजरना ही होगा। देवर या ननदोई से पहले निकाह होगा फिर शारीरिक संबंध बनाना होगा। फिर उनसे तलाक लेने के बाद पहले पति से निकाह संभव है। इतना कुछ होने के बाद ही ससुराल के आंगन में आने की परमिशन मिलेगी। अपने अस्मत को दूसरे के हवाले करने से बेहतर तसीमा ने कानून का रास्ता अख्तियार किया है।
विदित हो कि 1 अगस्त 2019 को देश में तीन तलाक या ट्रिपल तलाक कानून लागू हुआ था। पहले तीन तलाक के तहत कोई पति अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोल कर छोड़ देता था लेकिन अब ये भारत में गैरकानूनी है। तीन तलाक कानून के तहत अगर कोई पति अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोल कर छोड़ देता है तो उसे कानूनन तीन साल की सजा हो सकती है और पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है। इससे पहले 2017 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने ट्रिपल तलाक यानि तलाक-ए-बिद्दत को असंवैधानिक ठहराया था। कोर्ट ने सरकार को तीन तलाक को रोकने के लिए कानून का आदेश दिया था। तलाक-ए-बिद्दत के तहत इसमें शौहर अपनी बीवी को एक ही बार में तीन बार बोलकर या लिखकर तलाक दे सकता था। तीन बार तलाक के बाद शादी तुरंत टूट जाती थी। अब तीन तलाक गैर कानूनी है। तीन तलाक की प्रक्रिया में भी तलाकशुदा शौहर-बीवी दोबारा शादी कर सकते थे, लेकिन उसके लिए हलाला की प्रक्रिया को अपनाया जाता था। इसी हलाला के खिलाफ मुजफ्फरपुर की तसीमा ने झंडा उठाया है।