महादेव सट्टा सिंडिकेट पर CBI का शिकंजा: हर महीने ₹450 करोड़ की कमाई, अब संरक्षण देने वाले लोकसेवकों की होगी पहचान!

महादेव सट्टा सिंडिकेट पर CBI का शिकंजा: हर महीने ₹450 करोड़ की कमाई, अब संरक्षण देने वाले लोकसेवकों की होगी पहचान!


🛑सौरभ चंद्राकर 12 नवंबर तक CBI रिमांड पर; पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक व्यक्तियों की भूमिका की जांच तेज

🛑लॉकडाउन से अब तक चल रहा था करोड़ों का अवैध कारोबार, हवाला नेटवर्क के जरिए UAE भेजी जाती थी रकम

सीजी न्यूज ऑनलाइन, 05 नवंबर 2026। महादेव ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अब उन लोकसेवकों और प्रभावशाली लोगों की पहचान करने पर जोर दिया है, जिन्होंने कथित तौर पर इस अवैध कारोबार को संरक्षण देकर आर्थिक लाभ हासिल किया। मुख्य आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को 10 दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ के लिए सीबीआई दिल्ली ले गई है। एजेंसी ने अदालत में दावा किया कि लॉकडाउन की अवधि से अब तक महादेव सट्टा नेटवर्क के जरिए हर महीने करीब 450 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हो रही थी।

सीबीआई की विशेष अदालत ने सौरभ चंद्राकर की 12 नवंबर तक रिमांड मंजूर की है। जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में पूरे आपराधिक नेटवर्क, उसके सहयोगियों, हवाला ऑपरेटरों और कथित लाभार्थियों की पहचान करना बेहद जरूरी है।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए ओमान पहुंचा था आरोपी

सीबीआई ने अदालत को बताया कि सौरभ चंद्राकर को ओमान में फर्जी यात्रा दस्तावेजों के आधार पर अवैध प्रवेश के मामले में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद ओमान सरकार ने उसे भारत को सौंप दिया।

भारत पहुंचने पर 1 नवंबर को रात 7.35 बजे उसे गिरफ्तार किया गया। इससे पहले 9 सितंबर 2026 को उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। 2 नवंबर को दिल्ली की अदालत से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे रायपुर लाया गया।

हर महीने 450 करोड़ की कमाई, 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा प्रमोटरों के पास

सीबीआई के मुताबिक, महादेव बुक एप का संचालन सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके अन्य सहयोगियों द्वारा किया जा रहा था। ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए विभिन्न प्लेटफॉर्म तैयार किए गए थे, जिनका संचालन पैनल ऑपरेटरों के माध्यम से किया जाता था।

जांच एजेंसी का दावा है कि इस अवैध कारोबार से हर महीने करीब 450 करोड़ रुपये की कमाई होती थी। इसमें 70 से 80 प्रतिशत रकम प्रमोटर अपने पास रखते थे, जबकि शेष राशि पैनल ऑपरेटरों को दी जाती थी।

हवाला के जरिए UAE भेजी जाती थी सट्टे की रकम

सीबीआई के अनुसार, अवैध कमाई के लेन-देन के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाए गए थे। सट्टेबाजी से प्राप्त रकम विभिन्न बैंक खातों और हवाला नेटवर्क के माध्यम से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भेजी जाती थी।

इस रकम का इस्तेमाल सट्टेबाजी वेबसाइटों के प्रचार-प्रसार, विज्ञापन और बड़े आयोजनों में भी किए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी अब अवैध धन के संग्रह, वितरण और विदेशों में निवेश के तरीकों का पता लगाने में जुटी है।

पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक व्यक्तियों की भूमिका जांच के घेरे में

सीबीआई ने अदालत में आरोप लगाया कि महादेव सट्टा कारोबार को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए विभिन्न पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों और प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों को कथित तौर पर संरक्षण राशि दी जाती थी। हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से इस रकम का वितरण किए जाने का दावा किया गया है।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि किन अधिकारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों ने कथित तौर पर अवैध आर्थिक लाभ लिया। साथ ही, इस सिंडिकेट से जुड़ी अवैध संपत्तियों और उनके वास्तविक लाभार्थियों की भी जांच की जाएगी।

दुबई से संचालित होता था सिंडिकेट, छत्तीसगढ़ के युवाओं को बनाया गया कर्मचारी

सीबीआई के मुताबिक, महादेव बुक सिंडिकेट का मुख्यालय दुबई में था और वहीं से इसका संचालन किया जाता था। छत्तीसगढ़ के कई युवाओं को इस नेटवर्क में कर्मचारी, मैनेजर और सुपरवाइजर के रूप में नियुक्त किया गया था।

एजेंसी का कहना है कि सौरभ चंद्राकर से हिरासत में पूछताछ के बिना पूरे आपराधिक नेटवर्क का खुलासा करना संभव नहीं है। जांच में अन्य मास्टरमाइंड, सहयोगियों, हवाला ऑपरेटरों और कथित लाभार्थियों की पहचान की जानी है।

EOW से CBI को सौंपी गई जांच

महादेव ऑनलाइन सट्टा एप का मामला पहले छत्तीसगढ़ के आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) में दर्ज था। बाद में केंद्र और राज्य सरकार की अधिसूचनाओं के आधार पर इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

अब सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के जरिए सट्टा सिंडिकेट की आर्थिक गतिविधियों, कथित संरक्षण तंत्र और अवैध कमाई के नेटवर्क से जुड़े अहम खुलासे होने की संभावना है।