छत्तीसगढ़ में डेटा आधारित शासन को मिलेगी नई मजबूती, जियो-पोर्टल से बदलेंगी विकास योजनाओं की दिशा

छत्तीसगढ़ में डेटा आधारित शासन को मिलेगी नई मजबूती, जियो-पोर्टल से बदलेंगी विकास योजनाओं की दिशा


🛑190 से अधिक GIS डेटा लेयर्स और 35 से ज्यादा तकनीकी समाधान विकसित; AI चैट बॉट से एक क्लिक पर मिलेगी भौगोलिक जानकारी

🛑औद्योगिक भूमि चयन, बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार और संसाधन प्रबंधन में GIS तकनीक बनेगी मददगार

सीजी न्यूज ऑनलाइन, 04 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ में विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए तकनीक आधारित शासन व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) द्वारा राज्य स्तरीय जियो-पोर्टल और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) के उपयोग को बढ़ावा देने की पहल की गई है। इसके माध्यम से अब सरकारी विभाग भौगोलिक आंकड़ों के आधार पर विकास योजनाओं की बेहतर तैयारी, संसाधनों का आकलन और सटीक निर्णय ले सकेंगे।

नवा रायपुर स्थित एक निजी होटल में ‘शासन में भू-स्थानिक तकनीक का उपयोग’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में राज्यभर के 200 से अधिक अधिकारियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में GIS तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैट बॉट और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

190 से अधिक GIS डेटा लेयर्स, 35 से ज्यादा तकनीकी समाधान

कार्यशाला का शुभारंभ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद ने किया। उन्होंने बताया कि चिप्स द्वारा राज्य के लिए 190 से अधिक GIS डेटा लेयर्स का एकीकरण किया जा चुका है। इन आंकड़ों के आधार पर विभिन्न विभागों की जरूरतों के अनुरूप 35 से अधिक GIS आधारित टूल्स और समाधान विकसित किए गए हैं।

इन तकनीकी सुविधाओं से विभागों को भौगोलिक आंकड़ों का विश्लेषण करने, संसाधनों की वास्तविक स्थिति समझने और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी। जियो-पोर्टल के उपयोग के लिए सभी जिलों को यूजर नेम और पासवर्ड भी जारी किए जा चुके हैं।

AI चैट बॉट से एक क्लिक पर मिलेगी जानकारी

कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण जियो-पोर्टल पर विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैट बॉट रहा। इस सुविधा के माध्यम से उपयोगकर्ता किसी क्षेत्र, स्थान, परिसंपत्ति या स्थल का नाम सीधे चैट बॉट में दर्ज कर संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

अब भौगोलिक जानकारी खोजने के लिए लंबी सूची या ड्रॉप-डाउन मेन्यू में जाने की जरूरत नहीं होगी। स्थान का नाम लिखते ही पोर्टल का मानचित्र संबंधित क्षेत्र तक पहुंच जाएगा और उससे जुड़ी विस्तृत जानकारी तथा आवश्यक दिशा-निर्देश स्क्रीन पर दिखाई देंगे।

इससे अधिकारियों के लिए जरूरी सूचनाओं तक पहुंच आसान और तेज होगी।

औद्योगिक भूमि चयन और बैंकिंग सुविधाओं में होगा उपयोग

चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल ने GIS आधारित समाधानों के व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा औद्योगिक भूमि के चयन और नियोजन के लिए ‘लैंड पैच एनालिसिस’ का उपयोग किया जा रहा है।

इस तकनीक से संभावित औद्योगिक भूखंडों की पहचान, भूमि का डिजिटल विश्लेषण और उपयुक्त स्थानों का चयन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।

वहीं, संस्थागत वित्त संचालनालय (DIF) द्वारा ‘बैंक कवरेज एनालिसिस’ के माध्यम से बैंकिंग सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। इससे नई बैंक शाखाओं की स्थापना के लिए उपयुक्त स्थान निर्धारित करने में मदद मिलेगी।

GIS तकनीक औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन, संसाधन प्रबंधन और जनसुविधाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक GIS तकनीक के उपयोग

कार्यशाला में Esri India और Octave India के विशेषज्ञों ने भू-स्थानिक तकनीक के नवीनतम अनुप्रयोगों और शासन व्यवस्था में इसके उपयोग पर प्रस्तुतियां दीं।

इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने GIS आधारित योजनाओं, डेटा विश्लेषण तथा विभागीय जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित करने पर विचार-विमर्श किया।

कार्यशाला में Esri India के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत जोशी, हेड E.I.C. पीयूष मिश्रा, Octave India के विवेक चौहान एवं चंचल मुखर्जी, चिप्स के CEO मयंक अग्रवाल, संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपम आशीष टोप्पो, परियोजना प्रमुख संदीप टिकरिहा और हरीश सिन्हा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

पारदर्शी और परिणामोन्मुखी शासन की दिशा में पहल

छत्तीसगढ़ में जियो-पोर्टल और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम का विस्तार विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में तकनीक के उपयोग को नई दिशा देगा। GIS और AI के समन्वय से विभाग स्थानीय जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे तथा उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विकास कार्यों की प्राथमिकता तय कर सकेंगे।

डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने की यह पहल राज्य में डिजिटल शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।