🛑बीएकेएस का आरोप—कर्मचारियों के लाखों रुपये के नुकसान पर सरकार, सेल प्रबंधन और एनजेसीएस यूनियनों की चुप्पी; समझौते की वैधता और हस्ताक्षरों पर उठाए सवाल
भिलाई नगर 22 अक्टूबर 2026। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के कर्मचारियों के वेतन पुनरीक्षण-2017 को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। वेज रिवीजन के लिए 21-22 अक्टूबर 2021 को हुए एमओयू (समझौता ज्ञापन) को पांच साल पूरे होने के बावजूद एमओए (समझौता पत्र) नहीं होने और 39 माह के एरियर भुगतान का मुद्दा उठाते हुए बीएकेएस ने इस्पात मंत्रालय, सेल प्रबंधन और एनजेसीएस यूनियनों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बीएकेएस के कार्यकारी अध्यक्ष रणधीर कुमार का आरोप है कि वेतन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में नियमों और एनजेसीएस के संविधान की अनदेखी की गई। इसके बावजूद न तो कथित अनियमितताओं को सुधारने की पहल हुई और न ही कर्मचारियों के हित में प्रभावी आवाज उठाई गई। संगठन का दावा है कि इस पूरे मामले के कारण सेल कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
एमओयू की वैधता और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल
बीएकेएस ने आरोप लगाया कि एनजेसीएस के संविधान में सर्वसम्मति से निर्णय लेने की व्यवस्था होने के बावजूद बहुमत के आधार पर वेतन पुनरीक्षण का एमओयू किया गया। संगठन का कहना है कि इस प्रक्रिया पर न तो इस्पात मंत्रालय ने आपत्ति जताई और न ही संबंधित यूनियनों ने इसे चुनौती दी।
संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि वेतन पुनरीक्षण को प्रभावी करने की प्रक्रिया में ‘अफोर्डेबिलिटी’ जैसे प्रावधानों और वास्तविक एवं नोशनल प्रभावी तिथियों को लेकर अलग-अलग आधार क्यों अपनाए गए। बीएकेएस का दावा है कि इससे कर्मचारियों के हित प्रभावित हुए, लेकिन इस पर भी जवाबदेही तय नहीं की गई।
अधिकारी-कर्मचारी के वेतन लाभ में अंतर का मुद्दा
बीएकेएस ने वेतन पुनरीक्षण में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अलग-अलग एमजीबी (न्यूनतम गारंटीकृत लाभ) तथा पर्क्स तय किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन के अनुसार, अधिकारियों के लिए एमजीबी 15 प्रतिशत और पर्क्स 35 प्रतिशत, जबकि कर्मचारियों के लिए एमजीबी 13 प्रतिशत और पर्क्स 26.5 प्रतिशत निर्धारित किए गए।
संगठन का आरोप है कि अधिकारियों को अप्रैल 2020 से अक्टूबर 2021 तक की अवधि के पर्क्स एरियर का लाभ मिला, जबकि कर्मचारियों के पर्क्स एरियर को अलग प्रभावी तिथि से जोड़ा गया। बीएकेएस ने पूछा है कि दोनों वर्गों के बीच इस अंतर का आधार क्या था और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए एनजेसीएस यूनियनों ने क्या कदम उठाए?
39 माह के एरियर पर भी बरकरार है इंतजार
बीएकेएस के मुताबिक, वेतन पुनरीक्षण के एमओयू में 39 माह के एरियर भुगतान के लिए सब-कमेटी बनाए जाने का उल्लेख था। इसके बावजूद संगठन का आरोप है कि कर्मचारियों को अब तक अपेक्षित एरियर का भुगतान नहीं हुआ और सब-कमेटी की प्रक्रिया को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
संगठन ने यह सवाल भी उठाया कि जब एमओयू के आधार पर वेतन पुनरीक्षण लागू कर दिया गया, तो औपचारिक एमओए क्यों नहीं किया गया? बीएकेएस का कहना है कि सेल प्रबंधन ने इस संबंध में लिखित स्पष्टीकरण देने की दिशा में भी पर्याप्त पहल नहीं की।
एनजेसीएस की बैठकों और प्रतिनिधित्व पर सवाल
बीएकेएस ने औद्योगिक संबंधों और कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व को लेकर भी आपत्ति जताई है। संगठन का दावा है कि अक्टूबर 2021 के एमओयू के बाद वर्ष 2022 और 2024 में ही एनजेसीएस की बैठकें बुलाई गईं। संगठन ने बैठकें कम होने और कर्मचारियों की लंबित मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठाए हैं।
इसके अलावा, बीएकेएस ने एनजेसीएस में विभिन्न सेल इकाइयों के गैर-निर्वाचित नेताओं और नामांकित प्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि कर्मचारियों की ओर से समझौते करने का उन्हें किस आधार पर अधिकार मिला है। संगठन ने भिलाई इस्पात संयंत्र की मान्यता प्राप्त यूनियन के तत्कालीन प्रतिनिधित्व पर भी प्रश्न उठाया है।
वंश बहादुर सिंह के हस्ताक्षर पर उठाया सवाल
बीएकेएस ने दावा किया है कि भिलाई इस्पात संयंत्र की मान्यता प्राप्त यूनियन का कार्यकाल 9 अक्टूबर 2021 को समाप्त हो गया था। ऐसे में संगठन ने सवाल किया है कि 21-22 अक्टूबर 2021 को वेज रिवीजन एमओयू पर वंश बहादुर सिंह ने किस अधिकार के तहत हस्ताक्षर किए थे।
इस मुद्दे पर यूनियन के तत्कालीन अधिकार, कार्यकाल की स्थिति और हस्ताक्षर की वैधता को लेकर स्पष्टता की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
रणधीर कुमार बोले—कर्मचारियों के हितों की जवाबदेही तय हो
बीएकेएस के कार्यकारी अध्यक्ष रणधीर कुमार ने आरोप लगाया कि सेल प्रबंधन, इस्पात मंत्रालय और एनजेसीएस से जुड़े गैर-निर्वाचित नेताओं की भूमिका के कारण कर्मचारियों के हित प्रभावित हुए हैं। उन्होंने इसे कर्मचारियों के आर्थिक हितों और प्रतिनिधित्व से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।
बीएकेएस की प्रमुख मांग है कि वेज रिवीजन-2017 के एमओयू और एमओए की स्थिति स्पष्ट की जाए, 39 माह के एरियर भुगतान पर ठोस निर्णय लिया जाए तथा वेतन पुनरीक्षण की प्रक्रिया, प्रभावी तिथियों और प्रतिनिधियों के अधिकारों से जुड़े सवालों पर सेल प्रबंधन एवं इस्पात मंत्रालय स्पष्ट जवाब दें।
पांच साल बाद भी वेतन पुनरीक्षण से जुड़े इन सवालों का समाधान नहीं होना कर्मचारियों के बीच असंतोष का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि सेल प्रबंधन, इस्पात मंत्रालय और एनजेसीएस यूनियनें बीएकेएस द्वारा उठाए गए सवालों पर क्या रुख अपनाती हैं।

