🛑2027-28 से शुरू होंगी नई पहलें, छह भारतीय-विदेशी भाषाओं से होगी शुरुआत; AI मिशन के सहयोग से 35.48 करोड़ की परियोजना का प्रस्ताव
दुर्ग, 14 अक्टूबर 2026। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग में उच्च शिक्षा को आधुनिक तकनीक, रोजगारपरक पाठ्यक्रमों और वैश्विक अवसरों से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं मशीन लर्निंग उत्कृष्टता केंद्र, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा अध्ययन संस्थान, कृषि विज्ञान अध्ययन केंद्र तथा भारतीय एवं विदेशी भाषा केंद्र की स्थापना सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इनमें से कई योजनाएं शैक्षणिक सत्र 2027-28 से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी की अध्यक्षता में 12 अक्टूबर को विश्वविद्यालय ग्रंथालय में आयोजित कार्यपरिषद की 42वीं बैठक में ये निर्णय लिए गए। बैठक में विद्यार्थियों को नई तकनीक का प्रशिक्षण देने, कृषि शिक्षा के अवसर बढ़ाने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने और विज्ञान प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने से जुड़े प्रस्तावों पर भी सहमति बनी।
AI और मशीन लर्निंग पर 35.48 करोड़ खर्च करने की योजना
विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना को कार्यपरिषद ने मंजूरी दी है। पांच वर्षीय इस परियोजना पर लगभग 35.48 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य AI मिशन से 18.46 करोड़ रुपये का अनुदान मांगा जाएगा। प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा जाएगा।
इस केंद्र में चार अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, GPU कंप्यूट क्लस्टर से युक्त डेटा सेंटर, स्मार्ट कक्षाएं और इनक्यूबेशन स्थल विकसित करने की योजना है। अगले पांच वर्षों में 30 हजार विद्यार्थियों और 3 हजार शासकीय कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के साथ 20 स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे विद्यार्थियों को तकनीकी कौशल हासिल करने और नवाचार आधारित उद्यम शुरू करने के अवसर मिल सकेंगे।
रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन के लिए बनेगा संस्थान
विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा एवं सामरिक अध्ययन संस्थान की स्थापना को भी स्वीकृति दी गई है। इसके संचालन के लिए सात शैक्षणिक और नौ तकनीकी एवं अशैक्षणिक सहित कुल 16 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव पारित किया गया है। इन पदों पर सालाना लगभग 1.91 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है।
प्रस्ताव को उच्च शिक्षा संचालनालय के माध्यम से राज्य शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। संस्थान के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक अध्ययन जैसे विषयों में उच्च शिक्षा एवं अध्ययन की संभावनाएं विकसित करने की दिशा में पहल की जाएगी।
छह भाषाओं से होगी शुरुआत, आगे बढ़ेगा दायरा
विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति के साथ विदेशी भाषाओं का ज्ञान देने के उद्देश्य से सत्र 2027-28 से भारतीय एवं विदेशी भाषा केंद्र शुरू करने की मंजूरी दी गई है। पहले चरण में फ्रेंच, जर्मन, जापानी, छत्तीसगढ़ी, ओड़िया और मराठी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करने की योजना है।
आगे चलकर रूसी, स्पेनिश, कोरियाई, चीनी, अरबी, तमिल और उर्दू जैसी भाषाओं को भी चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा। इस पहल से विद्यार्थियों के लिए भाषा कौशल, उच्च अध्ययन और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।
कृषि विज्ञान में चार वर्षीय डिग्री, 40 सीटों का प्रस्ताव
विश्वविद्यालय में कृषि शिक्षा शुरू करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के सहयोग से कृषि विज्ञान अध्ययन केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति मिली है।
योजना के अनुसार, सत्र 2027-28 से कृषि विज्ञान में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने और इसके लिए 40 सीटें उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। पाठ्यक्रम में मधुमक्खी पालन और बीज उत्पादन प्रौद्योगिकी जैसे व्यावसायिक विषयों को भी शामिल किया जाएगा। इस उद्देश्य से दोनों विश्वविद्यालयों के बीच पांच वर्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया जाएगा।
विशेष शिक्षा के दो पाठ्यक्रमों को कार्योत्तर मंजूरी
विशेष शिक्षा के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने कदम बढ़ाया है। भारतीय पुनर्वास परिषद को शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए भेजे गए दो पाठ्यक्रमों के प्रस्तावों को कार्यपरिषद ने कार्योत्तर अनुमोदन प्रदान किया। ये पाठ्यक्रम श्रवण बाधिता और बौद्धिक अक्षमता से संबंधित हैं। दोनों पाठ्यक्रमों में 30-30 सीटें प्रस्तावित हैं।
SC, OBC और पात्र विद्यार्थियों को मिलेगी मुफ्त कोचिंग
भारत सरकार की योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय में डॉ. अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यहां पात्र अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा पीएम केयर्स योजना के लाभार्थी विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी कराने की योजना है।
इस केंद्र में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे, बैंकिंग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) की परीक्षाओं के लिए कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पात्र विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संस्थागत सहायता मिल सकेगी।
MSc प्रयोगशालाओं के लिए चार करोड़ रुपये मंजूर
विज्ञान संकाय की प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने के लिए भी कार्यपरिषद ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया। गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, प्राणीशास्त्र और वनस्पति शास्त्र के एमएससी पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक प्रयोगशाला उपकरणों की खरीदी हेतु बजट में प्रावधानित 400 लाख रुपये की राशि के प्राक्कलन को मंजूरी दी गई।
उपकरणों की खरीदी जेम पोर्टल और ई-प्रोक्योरमेंट के माध्यम से की जाएगी, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे और विद्यार्थियों को बेहतर प्रयोगशाला सुविधाएं मिल सकें।
बैठक में ये सदस्य रहे उपस्थित
कार्यपरिषद की बैठक में डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. राजलक्ष्मी सेलेट, डॉ. हंसा शुक्ला, विवेक मिश्रा और डॉ. शालिनी गुप्ता सदस्य के रूप में उपस्थित रहे। बैठक में पिछली कार्यपरिषद की बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि भी की गई। अंत में कुलसचिव डॉ. अनिल पांडे ने आभार व्यक्त किया।
विश्वविद्यालय के इन प्रस्तावों से तकनीकी शिक्षा, कृषि विज्ञान, भाषा अध्ययन, विशेष शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जैसे क्षेत्रों में नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है। हालांकि, संबंधित प्रस्तावों में जहां राज्य शासन की स्वीकृति या अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं आवश्यक हैं, वहां योजनाओं का क्रियान्वयन उन प्रक्रियाओं के पूरा होने पर निर्भर करेगा।

