दुर्ग जेल में प्रदेश की पहली खुली जेल की शुरुआत, 50 बंदियों को मिलेगा लाभ

दुर्ग जेल में प्रदेश की पहली खुली जेल की शुरुआत, 50 बंदियों को मिलेगा लाभ


🔴डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने किया ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन का शुभारंभ, सजा के साथ सुधार और पुनर्वास पर जोर

दुर्ग, 23 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में जेल सुधार और बंदियों के पुनर्वास की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। केंद्रीय जेल दुर्ग में प्रदेश की पहली ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन (ओसीआई) यानी खुली जेल का मंगलवार को शुभारंभ किया गया। डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने इसका विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर जेल अधीक्षक मनीष संभाकर सहित जेल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बंदी मौजूद रहे।

जेल अधीक्षक मनीष संभाकर ने बताया कि केंद्रीय जेल दुर्ग में उपलब्ध मौजूदा अधोसंरचना का उपयोग करते हुए ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन की शुरुआत की गई है। इसमें फिलहाल 50 चयनित बंदियों को रखा जाएगा। ये बंदी सुबह जेल परिसर से बाहर जाकर विभिन्न कार्यों में शामिल होंगे और दिनभर कार्य करने के बाद शाम को निर्धारित समय पर वापस जेल लौटेंगे। लॉकअप की प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी बंदियों की जेल में वापसी सुनिश्चित की जाएगी।

चारदीवारी से बाहर काम, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता का अवसर

ओपन जेल की व्यवस्था का उद्देश्य बंदियों को जेल की चारदीवारी से बाहर निकलकर काम करने, जिम्मेदारी निभाने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है। इसके माध्यम से बंदियों में अनुशासन और कार्यकुशलता विकसित करने के साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनर्वास के लिए तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।

जेल अधीक्षक के अनुसार, यह व्यवस्था सुधारात्मक प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसमें बंदियों को नियंत्रित वातावरण में काम करने का अवसर मिलेगा, जबकि निर्धारित नियमों के तहत शाम को उनकी जेल में वापसी सुनिश्चित होगी।

शासन की अधिसूचना के अगले दिन ही शुरू हुई व्यवस्था

ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन शुरू करने के संबंध में छत्तीसगढ़ शासन ने 21 सितंबर को अधिसूचना जारी की थी। इसके अगले ही दिन, 22 सितंबर को केंद्रीय जेल दुर्ग में प्रदेश की पहली खुली जेल का शुभारंभ कर दिया गया। जेल सुधार के क्षेत्र में इसे राज्य में एक नई व्यवस्था की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां सजा के साथ-साथ बंदियों के सुधार, कौशल विकास और पुनर्वास पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।