🔴करीब 100 अधिकारियों-जवानों ने की सघन तलाशी, जेल कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
दुर्ग, 18 सितंबर 2026। केंद्रीय जेल दुर्ग में गुरुवार सुबह जिला एवं पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने अचानक छापामार कार्रवाई कर जेल परिसर में हड़कंप मचा दिया। करीब सुबह 6 बजे शुरू हुई इस औचक कार्रवाई में जेल के बैरकों से लेकर शौचालय, अहाते और अन्य संभावित स्थानों की सघन तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान जेल परिसर से दो मोबाइल फोन, चिलम, बीड़ी-सिगरेट, तंबाकू, नेलकटर और कैंची सहित प्रतिबंधित एवं आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई।
पूरी कार्रवाई की कमान दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने संभाली। उनके साथ एडीएम वीरेंद्र सिंह, एडिशनल एसपी सिटी शोभराज अग्रवाल, सीएसपी दुर्ग हर्षित मेहर सहित प्रशासन और पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
करीब 100 अधिकारियों-जवानों ने संभाला मोर्चा
जेल की सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जिला एवं पुलिस प्रशासन की करीब 100 अधिकारियों और जवानों की विशेष टीम गठित की गई थी। टीम ने तड़के ही केंद्रीय जेल परिसर को घेर लिया और बिना पूर्व सूचना के तलाशी अभियान शुरू किया। अचानक हुई कार्रवाई से जेल प्रशासन और बंदियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
संयुक्त टीम ने जेल के विभिन्न बैरकों, शौचालयों, अहातों और संभावित छिपने के स्थानों को खंगाला। सघन तलाशी के दौरान बंदियों के कब्जे और बैरकों के गुप्त स्थानों से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए।
नशे के सामान के साथ कैंची और नेलकटर भी मिले
तलाशी में मोबाइल फोन के अलावा चिलम, बीड़ी, सिगरेट और तंबाकू जैसी सामग्री भी बरामद हुई। वहीं कैंची और नेलकटर जैसी वस्तुएं भी मिलीं, जिन्हें जेल की सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से प्रतिबंधित सामग्री माना जाता है।
जेल जैसे उच्च सुरक्षा वाले परिसर में प्रतिबंधित सामान और मोबाइल फोन मिलने के बाद अब यह जांच का विषय बन गया है कि आखिर ये वस्तुएं सुरक्षा जांच को चकमा देकर अंदर तक कैसे पहुंचीं।
जेल कर्मचारियों की भूमिका की भी होगी जांच
कार्रवाई के बाद संयुक्त टीम ने बरामद सभी आपत्तिजनक सामग्रियों की सूची तैयार कर वैधानिक पंचनामा बनाया है। पंचनामा रिपोर्ट कलेक्टर दुर्ग को सौंपी जा रही है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की दंडात्मक एवं सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक स्तर पर इस बात की भी जांच की जाएगी कि जेल के भीतर प्रतिबंधित सामग्री पहुंचने में कहीं किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही। यदि जांच में किसी की मिलीभगत या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही गई है।
औचक छापे की इस कार्रवाई को जेल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की जांच और प्रतिबंधित गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

