ई-बसों के रूट निर्धारण में निजी बस संचालकों के हितों का ध्यान रखने की मांग

ई-बसों के रूट निर्धारण में निजी बस संचालकों के हितों का ध्यान रखने की मांग


🔴छत्तीसगढ़ मिनी बस/बस महासंघ ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन, 13 बिंदुओं पर समस्याओं के निराकरण की मांग

दुर्ग, 17 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत छत्तीसगढ़ में संचालित होने वाली इलेक्ट्रिक बसों के मार्ग निर्धारण को लेकर छत्तीसगढ़ मिनी बस/बस महासंघ ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को ज्ञापन सौंपकर निजी यात्री बस संचालकों के हितों को ध्यान में रखने की मांग की है। महासंघ ने कहा है कि ई-बसों के रूट तय करते समय उन मार्गों पर पहले से संचालित स्टेज कैरेज परमिट वाली निजी बस सेवाओं को प्रभावित होने से बचाया जाए।

महासंघ के अनुसार, ई-बसों के संचालन के लिए मार्गों का चयन नगरीय निकायों द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। ऐसे में मार्ग चयन की प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाए तथा संबंधित बैठक में निजी बस संचालकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। महासंघ ने बताया कि दुर्ग जिले के प्रमुख मार्गों के साथ ही अंतरजिला मार्गों पर बड़ी संख्या में निजी यात्री बसें संचालित हैं और कई मार्गों पर बसों के बीच समय अंतराल महज 5 से 10 मिनट है।

ई-सिटी बसों को शहरी सीमा तक सीमित रखने की मांग

महासंघ ने मांग की है कि ई-सिटी बसों का संचालन सिटी बस की परिभाषा के अनुरूप शहरी सीमा के भीतर ही किया जाए। जिन मार्गों पर पहले से अत्यधिक संख्या में यात्री वाहन संचालित हो रहे हैं, वहां ई-बसों का संचालन नहीं किया जाए। साथ ही ई-सिटी बसों को एक जिले से दूसरे जिले तक का परमिट नहीं देने की मांग की गई है।

बस किराया बढ़ाने की मांग

डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए महासंघ ने साधारण बसों का किराया संशोधित करने की मांग की है। मांग के अनुसार प्रथम 5 किलोमीटर के लिए 12 रुपये तथा इसके बाद 1.75 रुपये प्रति किलोमीटर की दर निर्धारित की जाए।

फिटनेस और परिवहन विभाग से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं

बस संचालकों ने वाहन फिटनेस के दौरान सही स्थिति में होने के बावजूद C3 और C4 रेडियम बार-बार बदलवाने की प्रथा पर रोक लगाने की मांग की है। इसके अलावा जिन जिलों में फिटनेस सेंटर उपलब्ध नहीं हैं, वहां डीटीओ/आरटीओ स्तर पर फिटनेस की सुविधा पुनः शुरू करने की मांग की गई है। महासंघ का कहना है कि फिटनेस के लिए 150 से 200 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, जिससे वाहन मालिकों पर अतिरिक्त ईंधन खर्च और समय का भार पड़ता है।

ऑल इंडिया परमिट बसों के संचालन पर नियंत्रण की मांग

ज्ञापन में ऑल इंडिया परमिट वाली बसों के बस स्टैंड में प्रवेश और स्थानीय सवारियां उठाने पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी की गई है। महासंघ का कहना है कि ऐसी बसों के कारण स्थानीय निजी बस संचालकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से संचालित हो रही ऑल इंडिया परमिट बसों के संचालन पर भी तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

इसके साथ ही वर्ष 2014 के व्हीलबेस नियम को संशोधित कर कारपेट एरिया के आधार पर सीटिंग क्षमता निर्धारित करने, कर प्रमाण-पत्र की वैधता संबंधी प्रक्रिया को सरल बनाने तथा साधारण परमिट से आच्छादित यात्री बसों में 87/1A का परमिट ऑनलाइन जारी करने की मांग रखी गई है।

परिवहन कार्यालयों की व्यवस्था में बदलाव का सुझाव

महासंघ ने सेक्टर-27 स्थित परिवहन कार्यालय के संबंधित कर्मचारियों को इंद्रावती भवन में शिफ्ट करने का सुझाव दिया है, ताकि दूरदराज से आने वाले वाहन मालिकों को सुविधा मिल सके। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार के पास केवल नए परमिट से संबंधित कार्य रखने और अन्य कार्यों को पांचों संभाग स्तर पर सौंपने की मांग भी की गई है।

परमिट जारी करने में समय अंतराल तय करने की मांग

महासंघ ने शहरी मार्गों पर कम से कम 10 मिनट तथा ग्रामीण मार्गों पर 25 से 30 मिनट के अंतराल के आधार पर परमिट जारी करने की मांग की है। इसके अलावा शादी-ब्याह और पिकनिक सीजन में स्कूल बसों तथा मालवाहक वाहनों में यात्रियों को बैठाकर परिवहन करने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई और ऐसे वाहनों को राजसात करने के लिए कानूनी प्रावधान बनाने की मांग भी की गई है।

छत्तीसगढ़ मिनी बस/बस महासंघ ने मुख्यमंत्री से ज्ञापन में शामिल सभी 13 बिंदुओं पर विचार करते हुए समस्याओं के निराकरण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है।