शादी का वादा बाद में टूटना मात्र धारा 69 BNS के तहत अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट

शादी का वादा बाद में टूटना मात्र धारा 69 BNS के तहत अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट


सीजी न्यूज़ ऑनलाइन, 16 सितंबर 2026। शादी के वादे पर बने यौन संबंध और बाद में विवाह से इनकार के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के दायरे को स्पष्ट किया है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि केवल बाद में शादी से इनकार कर देना धारा 69 के तहत अपराध के लिए पर्याप्त नहीं है। अपराध तभी बनता है, जब शादी का वादा शुरुआत से ही पूरा करने की नीयत के बिना किया गया हो और उस धोखे के कारण महिला ने यौन संबंध के लिए सहमति दी हो।

मामला गुजरात के वडोदरा स्थित सयाजीगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़ा था। FIR में आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी करने से इनकार कर दिया। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने बाद में यह कहते हुए विवाह से इनकार किया कि उसकी मां इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थी।

आरोपी ने FIR को रद्द कराने के लिए गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत में दर्ज घटनाक्रम पर गौर करते हुए पाया कि दोनों की मुलाकात डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हुई थी और इसके बाद उनके बीच दोस्ती तथा प्रेम संबंध विकसित हुए। शिकायत में यह भी कहा गया था कि पहली मुलाकात के दौरान आरोपी ने शादी की इच्छा जताई थी और बाद में दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। कोर्ट ने इसे ऐसी स्थिति नहीं माना, जिसमें शुरुआत से ही धोखे से यौन संबंध के लिए सहमति हासिल की गई हो।

पीठ ने कहा कि केवल शादी करने की इच्छा व्यक्त करना अपने आप में ‘धोखाधड़ीपूर्ण साधन’ नहीं माना जा सकता। कोर्ट के अनुसार, शिकायत में आरोपी द्वारा बाद में शादी से इनकार करने का कारण उसकी मां की असहमति बताया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यदि शादी का वादा किया गया था तो उसे शुरुआत से ही धोखे की नीयत से किया गया था, ऐसा नहीं कहा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामले में धारा 69 BNS के आवश्यक तत्व सामने नहीं आते और इसलिए आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का आधार नहीं है। पीठ ने 20 मई 2025 को सयाजीगंज पुलिस स्टेशन, वडोदरा सिटी में दर्ज FIR क्रमांक 11196030250292 को रद्द कर दिया और अपील स्वीकार कर ली। फैसला 7 सितंबर 2026 को सुनाया गया।

क्या कहती है BNS की धारा 69?

धारा 69 में ऐसे मामलों को दंडनीय बनाया गया है, जिनमें कोई व्यक्ति धोखाधड़ीपूर्ण साधनों या महिला से शादी करने का ऐसा वादा करके यौन संबंध बनाता है, जिसे पूरा करने की उसकी कोई मंशा ही नहीं थी। इसके तहत अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मुख्य बिंदु यह है कि वास्तविक या बाद में उत्पन्न परिस्थितियों के कारण शादी न हो पाना और शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाना—दोनों को एक समान नहीं माना जा सकता।