Durg Court : 6 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी को मृत्युदंड

Durg Court : 6 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी को मृत्युदंड


🔴पॉक्सो कोर्ट ने माना ‘विरलतम से विरलतम’ मामला, दोषी सोमेश यादव को दो धाराओं में मृत्युदंड की सजा और 11 हजार रुपये अर्थदंड

दुर्ग, 10 सितंबर 2026। छह वर्षीय बालिका से दुष्कर्म और हत्या के गंभीर मामले में विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग ने आरोपी सोमेश यादव (24) को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने मामले को ‘विरलतम से विरलतम’ श्रेणी का मानते हुए पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड तथा दोनों धाराओं में 5-5 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। वहीं बीएनएस की धारा 238(क) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 1 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

यह फैसला 10 सितंबर 2026 को विशेष दांडिक प्रकरण क्रमांक 44/2025 में अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफटीएससी, विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग द्वारा सुनाया गया। मृत्युदंड की पुष्टि की प्रक्रिया कानून के अनुसार छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर के समक्ष होगी।

लापता होने की सूचना मिलते ही शुरू हुई तलाश

मामला थाना मोहन नगर के अपराध क्रमांक 133/2025 से संबंधित है। पुलिस के अनुसार 6 अप्रैल 2025 को छह वर्ष तीन माह की बालिका के लापता होने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही मोहन नगर पुलिस ने बिना देरी किए बालिका की तलाश शुरू कर दी। पुलिस टीमों ने संभावित स्थानों पर तलाश के साथ उपलब्ध तकनीकी एवं मैदानी सूचनाओं के आधार पर पतासाजी की।

तलाश के दौरान पुलिस टीम ने बालिका को एक वाहन से बरामद किया और तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर शव पंचनामा, पोस्टमार्टम सहित आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू की।

वैज्ञानिक साक्ष्यों को बनाया विवेचना का आधार

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर वहां से उपलब्ध भौतिक एवं जैविक साक्ष्यों को संकलित किया। विवेचना के दौरान पुलिस ने केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय, DNA, जैविक, इलेक्ट्रॉनिक और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को एकत्र कर वैज्ञानिक परीक्षण कराया।

पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए। आरोपी के मेमोरेण्डम के आधार पर संबंधित वस्तुओं की बरामदगी एवं जप्ती की गई। आरोपी के कपड़ों और घटनास्थल से मिली सामग्रियों को सुरक्षित कर FSL एवं DNA परीक्षण के लिए भेजा गया।

इसके अलावा मृतिका से संबंधित आवश्यक जैविक नमूने, कपड़े, स्वाब, बाल, नाखून एवं अन्य सामग्री विधिवत जप्त की गई। आरोपी एवं संबंधित व्यक्तियों के DNA परीक्षण के लिए नमूने लिए गए। घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध CCTV फुटेज एवं DVR को भी सुरक्षित कर जप्त किया गया।

वैज्ञानिक एवं तकनीकी रिपोर्टों को चिकित्सकीय और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ विवेचना में शामिल कर अभियोजन के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

आरोपी को दोषसिद्ध कर सुनाई गई फांसी की सजा

न्यायालय ने आरोपी सोमेश यादव, निवासी ओम नगर, उरला, वार्ड क्रमांक 58, थाना मोहन नगर, जिला दुर्ग को पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(ड), 5(ढ) सहपठित धारा 6(1) तथा बीएनएस की धारा 103(1), 65(2) एवं 238(क) के तहत दोषसिद्ध किया।

न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट की धारा 6(1) और बीएनएस की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड एवं प्रत्येक में 5 हजार रुपये अर्थदंड तथा बीएनएस की धारा 238(क) के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। आदेश के अनुसार सभी दंड एक साथ भुगतने होंगे।

मृत्युदंड हाईकोर्ट की पुष्टि के अधीन है।

आरोपी अप्रैल 2025 से जेल में

पुलिस के अनुसार आरोपी को 8 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया था। मामले में 9 मई 2025 को चालान पेश किया गया, जबकि 26 मई 2025 को आरोप गठित किए गए। अभियोजन साक्ष्य की शुरुआत 11 जून 2025 से हुई। न्यायालय ने 2 सितंबर 2026 को निर्णय सुरक्षित किया था और 10 सितंबर को फैसला सुनाया।

पीड़ित परिवार को 7 लाख रुपये क्षतिपूर्ति

न्यायालय ने मृतिका के परिजनों को राज्य सरकार की आहत प्रतिकर योजना के तहत 7 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान किए जाने का निर्देश भी दिया है।

पुलिस टीम की भूमिका सराहनीय

प्रकरण की त्वरित विवेचना के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष टीम गठित की गई थी। टीम का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर एवं थाना प्रभारी निरीक्षक शिव चंद्रा ने किया। पतासाजी, घटनास्थल से साक्ष्य संरक्षण, वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य संकलन, आरोपी की गिरफ्तारी, FSL एवं DNA परीक्षण तथा न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में थाना मोहन नगर के विवेचक सहित संबंधित पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती रूपवर्षा दिल्लीवार ने पैरवी की।

दुर्ग पुलिस ने कहा कि इस मामले में त्वरित प्रतिक्रिया से लेकर वैज्ञानिक विवेचना और न्यायालयीन प्रक्रिया तक प्रत्येक स्तर पर साक्ष्य आधारित कार्रवाई सुनिश्चित की गई। पुलिस ने बालिका की पहचान और गरिमा की रक्षा के लिए उसकी पहचान से जुड़ी किसी भी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया है।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस की अपील

दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि बच्चों से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि, गुमशुदगी अथवा अपराध की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। पुलिस के अनुसार समय पर मिलने वाली सूचना से बच्चों की तलाश, अपराध की रोकथाम और साक्ष्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण मदद मिलती है।

नोट: मृत्युदंड का आदेश हाईकोर्ट की पुष्टि के अधीन है। इसलिए इसे न्यायालय द्वारा सुनाई गई पुष्टि-अधीन मृत्युदंड की सजा के रूप में रिपोर्ट किया जाना उचित है।