🔴रोहिणी नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, पूजा- विधि और आरती
सीजी न्यूज़ ऑनलाइन, 02 सितंबर 2026। Kab Hai Janmashtami 2026: हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का विशेष महत्व है। हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में धरती पर अवतार लिया था। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाकर विधि-विधान से पूजा करते हैं। मंदिरों और घरों में बाल गोपाल की झांकी सजाई जाती है और भगवान को पंचामृत से स्नान कराकर माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है। आपको बता दें कि इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का ऐसा संयोग बन रहा है, जिसे करीब 15 साल बाद देखने को मिल रहा है। आइए जानते हैं तिथि और पूजा- विधि…
जन्माष्टमी तिथि 2026 (Kab Hai Janmashtami 2026)
अष्टमी तिथि का आरंभ: 3 सितंबर, रात्रि 12:26 मिनट पर
अष्टमी तिथि का समापन: 4 सितंबर, रात्रि 12:14 मिनट पर
पंचांग की गणना के आधार पर कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।
15 साल बाद अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग
साल 2026 जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। इस बार 4 सितंबर को अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है। रोहिणी नक्षत्र और तिथि का संयोग लगभग 15 साल बाद बन रहा है। धार्मिक मान्यता है कि जब श्रीकृष्ण ने देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया था, उस समय अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग था।
पूजा का शुभ मुहूर्त 2026
फ्यूचर पंचांग के मुताबिक 4 सितंबर की रात करीब 11 बजकर 56 मिनट से 5 सितंबर की रात 12 बजकर 41 मिनट तक निशीथ पूजा का समय रहेगा। आपको बता दें कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की पूजा में निशीथ काल का विशेष महत्व माना जाता है।
जन्माष्टमी पूजा-विधि
जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल पर बाल गोपाल की प्रतिमा या तस्वीर को साफ करके चौकी पर स्थापित करें। इसके बाद भगवान को गंगाजल, पंचामृत और शुद्ध जल से स्नान कराएं। उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और चंदन, अक्षत, फूल, तुलसी दल और माला अर्पित करें।
इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री, फल, मिठाई और अन्य सात्विक पकवानों का भोग लगाएं। धूप और दीप जलाकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें और श्रीकृष्ण की आरती करें। रात 12 बजे भगवान के जन्म के समय शंख और घंटियां बजाकर जन्मोत्सव मनाएं। बाल गोपाल को झूला झुलाएं और उन्हें माखन-मिश्री का भोग लगाएं। अंत में परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत का पारण करें।

