🔴फिंगरप्रिंट-चांस प्रिंट से लेकर NAFIS तक की दी गई ट्रेनिंग, E-FSL और E-Prosecution पर भी अंतरविभागीय समन्वय; जांच को वैज्ञानिक और डिजिटल बनाने पर जोर
दुर्ग, 14 अगस्त 2026। नवीन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और अपराधों की विवेचना को वैज्ञानिक एवं तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए दुर्ग पुलिस ने एक साथ दो महत्वपूर्ण पहल की हैं। पुलिस लाइन स्थित दधीचि भवन में जिले के विवेचकों एवं MOB आरक्षकों को फिंगरप्रिंट और चांस प्रिंट से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने का प्रशिक्षण दिया गया। वहीं पुलिस कंट्रोल रूम सेक्टर-06 भिलाई में पुलिस, FSL, अभियोजन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ अंतरविभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई।
इस पहल का उद्देश्य घटनास्थल से मिलने वाले वैज्ञानिक साक्ष्यों को अधिक प्रभावी ढंग से सुरक्षित करने, उनकी पहचान करने और न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
फिंगरप्रिंट से लेकर चांस प्रिंट तक की बारीकियां समझीं
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के निर्देशन में आयोजित प्रशिक्षण में रायपुर के उप पुलिस अधीक्षक एवं फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट अजय साहू ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को फिंगरप्रिंट साइंस की व्यावहारिक जानकारी दी।
प्रशिक्षण में घटनास्थल से फिंगरप्रिंट एवं चांस प्रिंट की खोज, उन्हें वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने, सुरक्षित रखने, अभिलेखीकरण और पहचान की प्रक्रिया समझाई गई। साथ ही फिंगरप्रिंट डेवलपिंग किट के प्रभावी उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया गया।
पुलिसकर्मियों को यह भी बताया गया कि घटनास्थल से प्राप्त वैज्ञानिक साक्ष्यों को किस तरह सुरक्षित रखा जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें न्यायालय में प्रभावी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
CRPI Act और NAFIS पर भी विशेष प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान Criminal Procedure (Identification) Act, 2022 (CRPI Act) के तहत फिंगरप्रिंट एवं अन्य पहचान संबंधी अभिलेख और नमूने लिए जाने के वैधानिक प्रावधानों की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) और उपलब्ध डिजिटल माध्यमों के उपयोग की जानकारी भी दी गई। इसका उद्देश्य संदिग्ध, अज्ञात और अपराध से जुड़े व्यक्तियों की पहचान प्रक्रिया को अधिक तेज एवं वैज्ञानिक बनाना है।
E-FSL और E-Prosecution पर भी मंथन
पुलिस कंट्रोल रूम सेक्टर-06 भिलाई में आयोजित समन्वय बैठक में पुलिस के साथ FSL, अभियोजन एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और चिकित्सकों ने भाग लिया।
बैठक में FSL प्रभारी डॉ. पंकज ताम्रकार ने E-FSL से संबंधित प्रक्रियाओं पर जानकारी दी, जबकि DPO सुनील चौरसिया ने E-Prosecution से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा की।
इसके अलावा MLC और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ऑनलाइन उपलब्ध कराने, रिपोर्टों के समयबद्ध प्रेषण और डिजिटल माध्यम से पुलिस विवेचना में उनके प्रभावी उपयोग को लेकर चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ आवश्यक समन्वय किया गया।
डिजिटल जांच से तेज होगा न्याय का रास्ता
बैठक में E-Challan सहित नवीन कानूनों के अनुरूप डिजिटल प्रक्रियाओं को प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। पुलिस का मानना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अभियोजन से जुड़े दस्तावेज यदि समय पर डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होते हैं, तो विवेचना की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार होगा।
दुर्ग पुलिस अब वैज्ञानिक साक्ष्य, फॉरेंसिक तकनीक, डिजिटल सिस्टम और अंतरविभागीय समन्वय को अपराध जांच की मजबूत कड़ी बनाने की दिशा में काम कर रही है।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चन्द्रा, फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट अजय साहू, FSL प्रभारी डॉ. पंकज ताम्रकार, DPO सुनील चौरसिया, चिकित्सकगण, स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधि तथा जिले के विभिन्न थाना एवं सीसीटीएनएस प्रभारी और MOB आरक्षक उपस्थित रहे।
दुर्ग पुलिस का लक्ष्य—वैज्ञानिक जांच, मजबूत साक्ष्य और प्रभावी अभियोजन
दुर्ग पुलिस का कहना है कि नवीन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस के साथ FSL, अभियोजन और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। इसी दिशा में प्रशिक्षण और समन्वय कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि अपराध की जांच केवल बयान और पारंपरिक तरीकों तक सीमित न रहे, बल्कि वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अधिक मजबूत हो।
पुलिस का लक्ष्य वैज्ञानिक विवेचना और डिजिटल प्रक्रियाओं को मजबूत कर अपराधियों की पहचान से लेकर न्यायालय में प्रभावी अभियोजन तक पूरी प्रक्रिया को अधिक सटीक, तेज और पारदर्शी बनाना है।

