CJI Surya Kant: बाबा खतरनाक को सुप्रीम कोर्ट ने पढ़ा दिया पाठ

CJI Surya Kant: बाबा खतरनाक को सुप्रीम कोर्ट ने पढ़ा दिया पाठ


🔴कहा-आप दूसरी समस्याओं पर ध्यान दीजिए

सीजी न्यूज ऑनलाइन 29 जुलाई 2026 । भारत के एक राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चक्र से जुड़ा एक मामला सुप्रीम कोर्ट में याचिका के रूप में आया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता बाबा खतरनाक को पाठ पढ़ा दिया और कहा-ये मामला हम खुद देख लेंगे, आप दूसरी समस्याओं पर ध्यान दीजिए।

सु्प्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय की इमारत पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चक्र स्थापित करने से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों का निर्णय न्यायालय खुद करेगा।

सुप्रीम कोर्ट के गेट पर क्या लगाना है, हम देख लेंगे: CJI

यह याचिका बदरवाद वेणुगोपाल ने दायर की थी, जिन्हें बाबा खतरनाक के नाम से भी जाना जाता है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के गेट पर क्या लगाना है हम देख लेंगे…। आप दुनिया में इतनी समस्याएं हैं उनका ध्यान रखिए।’

अनुच्छेद 32 के तहत दायर की थी याचिका

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के मुख्य गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने से जुड़ी थी। इसे याचिकाकर्ता ने ‘अदालतों की संवैधानिक पहचान’ बताया था। कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, वेणुगोपाल ने पहले संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत एक रिट याचिका दायर करके इस मामले पर निर्देश देने की मांग की थी।

मुख्य गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने के बारे में मांगी थी जानकारी

23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि इस मामले की मुख्य रूप से प्रशासनिक स्तर पर जांच की जरूरत है और कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल को निर्देश दिया कि वे सक्षम अधिकारी के सामने उचित नोट पेश करें। इसके बाद, याचिकाकर्ता ने एक अर्जी दायर करके सुप्रीम कोर्ट के मुख्य गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने के संबंध में 23 मार्च को कोर्ट द्वारा जारी प्रशासनिक निर्देशों की स्थिति और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के बारे में जानकारी मांगी।

रजिस्ट्रार ने दाखिल की थी एक अर्जी

सुप्रीम कोर्ट रूल्स, 2013 के तहत रजिस्ट्रार ने 3 जुलाई को यह अर्ज़ी दाखिल की थी। इसके बाद वेणुगोपाल ने रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ़ अपील दायर की, जिस पर मंगलवार को बेंच के सामने सुनवाई हुई। हालांकि, बेंच ने इसमें दखल देने से इनकार करते हुए अर्जी खारिज कर दी और कहा कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में क्या दिखाया जाए, यह मामला कोर्ट के अपने प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है।