🔴भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन के दौरान खुला मामला, पहले की सेवा समाप्त, फिर दर्ज हुआ दुर्ग में अपराध
दुर्ग, 30 जून 2026। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में आरक्षक (जीडी) पद पर भर्ती पाने के लिए कथित रूप से फर्जी जाति एवं निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का मामला सामने आया है। दस्तावेजों के सत्यापन में प्रमाण पत्र कूटरचित पाए जाने के बाद CISF ने संबंधित आरक्षक की सेवा समाप्त कर दी है। वहीं उतई पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कर प्रकरण को आगे की कार्रवाई के लिए मध्यप्रदेश पुलिस को भेज दिया है।
दस्तावेज जांच में हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
पुलिस के अनुसार, एसएससी जीडी भर्ती-2025 के तहत आरक्षक (जीडी) पद पर चयनित मोहित (27 वर्ष) ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे। भर्ती के बाद वह CISF आरटीसी भिलाई, उतई में बुनियादी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा था।
उप महानिरीक्षक कार्यालय, CISF आरटीसी भिलाई द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित अधिकारियों से कराया गया। जांच में तहसीलदार लालबर्रा, जिला बालाघाट (मध्यप्रदेश) के कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट में निवास प्रमाण पत्र गलत पाया गया, जबकि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) वारासिवनी, जिला बालाघाट की रिपोर्ट में जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मिली थी नौकरी
CISF अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर भर्ती प्रक्रिया पूरी की और आरक्षक (जीडी) के पद पर नियुक्ति प्राप्त कर ली। दस्तावेजों के सत्यापन में गड़बड़ी सामने आने के बाद 29 जून 2026 को उसकी सेवा समाप्त कर दी गई।
उतई पुलिस ने दर्ज किया अपराध
उप महानिरीक्षक कार्यालय, CISF आरटीसी भिलाई द्वारा उतई थाना में लिखित शिकायत भेजी गई, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपी मोहित के खिलाफ धारा 318(4), 336(3) और 340(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध दर्ज किया।
भोपाल में हुई थी भर्ती प्रक्रिया
प्राथमिक जांच में सामने आया कि भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेज जमा करने की कार्रवाई CISF यूनिट BHEL, भोपाल (मध्यप्रदेश) में हुई थी। घटना स्थल भोपाल क्षेत्राधिकार में आने के कारण उतई पुलिस ने बिना नंबर अपराध दर्ज कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई हेतु मामला थाना गोविंदपुरा, जिला भोपाल को प्रेषित कर दिया है।
पुलिस जांच जारी
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज स्वयं आरोपी ने तैयार किए थे या किसी अन्य व्यक्ति अथवा गिरोह की मदद से बनवाए गए थे। मामले में आगे की विवेचना मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा की जाएगी।

