फर्जी पट्टा बनाकर होम लोन लेने की कोशिश, जालसाजी का मामला दर्ज

फर्जी पट्टा बनाकर होम लोन लेने की कोशिश, जालसाजी का मामला दर्ज


🔴सरपंच की शिकायत पर रानीतराई पुलिस की कार्रवाई, ऋण आवेदन तो हुआ निरस्त पर खुल गई फर्जीवाड़े की पोल

दुर्ग, 29 जून 2026। जिले के रानीतराई थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तेलीगुंडरा में पंचायत भूमि का कथित फर्जी पट्टा तैयार कर होम लोन लेने की कोशिश का मामला सामने आया है। सरपंच की शिकायत और जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जालसाजी, कूटरचना एवं धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

रानी तराई थाना प्रभारी कमल सिंह सेंगर से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत तेलीगुंडरा की सरपंच हुलेश्वरी साहू ने 6 जून 2026 को थाना रानीतराई में शिकायत दर्ज कराई थी कि गांव निवासी धनेश्वर पिता बिसरू निर्मलकर ने पंचायत की भूमि का फर्जी पट्टा प्रमाण पत्र तैयार कर वित्तीय संस्था से ऋण प्राप्त करने का प्रयास किया है।

घास भूमि का बनाया फर्जी पट्टा

शिकायत में बताया गया कि ग्राम पंचायत की खसरा नंबर 317 की घास भूमि के लगभग 1800 वर्गफुट हिस्से का फर्जी पट्टा तैयार कर उसे अपनी भूमि दर्शाया गया। आरोप है कि उक्त दस्तावेज के आधार पर घर निर्माण के लिए ऋण लेने का प्रयास किया गया।

जांच में सामने आई जालसाजी

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सरपंच, सरपंच प्रतिनिधि एवं पंचायत अभिलेखों की जांच की। जांच में पाया गया कि जिस पट्टा प्रमाण पत्र के आधार पर ऋण आवेदन किया गया था, वह ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कहीं दर्ज नहीं है। दस्तावेज में लगी मुहर और हस्ताक्षर भी पंचायत द्वारा जारी नहीं किए गए थे।

सरपंच हुलेश्वरी साहू ने स्पष्ट रूप से बताया कि उन्होंने केवल ऋण प्रक्रिया के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जबकि कथित पट्टा प्रमाण पत्र पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं।

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी ने नहीं दिया ऋण

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान आधार हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड, न्यू दीपक नगर, दुर्ग से भी जानकारी प्राप्त की। कंपनी ने बताया कि धनेश्वर निर्मलकर द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच और आंतरिक मूल्यांकन के बाद ऋण आवेदन स्वीकृत नहीं किया गया था तथा आवेदन निरस्त कर दिया गया। कंपनी की ओर से किसी प्रकार का ऋण वितरण नहीं किया गया।

फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर ऋण लेने का प्रयास

जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि आरोपी ने जाली पट्टा प्रमाण पत्र तैयार कर उसे वित्तीय संस्था में प्रस्तुत किया, जिससे ऋण प्राप्त किया जा सके। हालांकि ऋण स्वीकृत नहीं हुआ, लेकिन दस्तावेजों में कूटरचना और धोखाधड़ी का प्रयास सामने आया।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

रानीतराई पुलिस ने आरोपी धनेश्वर निर्मलकर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 338, 336(3) एवं 340(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है।

रानी तराई थाना प्रभारी कमल सिंह सिंगर के मुताबिक दस्तावेजों की सत्यता, जालसाजी में अन्य लोगों की भूमिका और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो मामले में और धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।