🔴निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग
सीजी न्यूज ऑनलाइन 10 जून 2026। भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) ने 8 जून 2026 को विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (आरआईएनएल) में हुए भीषण हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसकी निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की है। इस दुर्घटना में 8 कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
सीटू के महासचिव ईलामरम करीम ने जारी बयान में कहा कि हादसा स्टील मेल्टिंग शॉप (एसएमएस) से पिघले हुए तरल स्टील को कंटीन्यूअस कास्टिंग सिस्टम तक ले जाने के दौरान हुआ। मृतकों में 3 नियमित कर्मचारी, 4 ठेका मजदूर और एक अधिकारी शामिल हैं। संगठन ने आशंका जताई है कि घायलों की स्थिति को देखते हुए मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है।
हादसे को “आगजनी” बताने पर सवाल
सीटू ने प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा जारी प्रारंभिक जानकारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे केवल “आग लगने की घटना” बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। संगठन का आरोप है कि यह दुर्घटना सुरक्षा मानकों और मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) के गंभीर उल्लंघन का परिणाम हो सकती है।
सीटू के अनुसार, गर्म पिघले स्टील को कंटीन्यूअस कास्टर तक पहुंचाने से पहले लैडल फर्नेस (एलएफ) और अन्य प्रक्रियाओं के माध्यम से उसका समुचित समरूपीकरण और डीगैसीफिकेशन किया जाना आवश्यक होता है। यदि इस प्रक्रिया में चूक होती है तो विस्फोट और धातु रिसाव जैसी गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप
संगठन ने आरोप लगाया कि विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में आवश्यक क्षमता के अनुरूप लैडल फर्नेस की संख्या नहीं बढ़ाई गई, जबकि विभिन्न यूनियनों द्वारा लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी। सीटू ने यह भी दावा किया कि फेरो-अलॉय की गुणवत्ता और सुरक्षा प्रक्रियाओं के पालन में भी गंभीर खामियां थीं।
सीटू ने प्रबंधन पर कर्मचारियों की संख्या में लगातार कटौती, नई भर्ती रोकने, जबरन वीआरएस लागू करने तथा हजारों कुशल ठेका श्रमिकों को हटाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे सुरक्षित संचालन प्रभावित हुआ है।
भिलाई इस्पात संयंत्र की घटना का दिया उदाहरण
सीटू वरिष्ठ नेता एसपी डे ने कहा कि इसी तरह की एक दुर्घटना 4 जून 2022 को भिलाई इस्पात संयंत्र के एसएमएस-2 विभाग में भी हुई थी। उस दौरान हॉट मेटल ट्रांसफर के समय क्रेन हुक का ब्रेक फेल होने से गर्म धातु से भरा लैडल नीचे गिर गया था और हॉट मेटल बाहर फैल गया था। हालांकि उस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई थी।
संगठन के अनुसार, उस समय भी सीटू ने प्रबंधन को पत्र लिखकर कर्मचारियों द्वारा सुझाए गए सुरक्षा उपायों को लागू करने की मांग की थी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और किसी दुर्घटना की स्थिति में उसके प्रभाव को कम किया जा सके।
सीटू की प्रमुख मांगें
- हादसे की किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- सुरक्षा मानकों और एसओपी के पालन में हुई चूक की जवाबदेही तय की जाए।
- सभी प्रभावित श्रमिकों और उनके परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।
- मृतक कर्मचारियों के परिजनों को स्थायी रोजगार प्रदान किया जाए।
- स्टील संयंत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशिक्षित जनशक्ति की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
सीटू ने कहा कि यदि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाते, तो इस दर्दनाक हादसे को टाला जा सकता था।

