MCC का उल्लंघन है PM का राष्ट्र के नाम संबोधन, CEC लें ऐक्शन; 700 पूर्व नौकरशाहों…

MCC का उल्लंघन है PM का राष्ट्र के नाम संबोधन, CEC लें ऐक्शन; 700 पूर्व नौकरशाहों…


सीजी न्यूज़ ऑनलाइन, 21 अप्रैल। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को संबोधित एक शिकायत पत्र में हस्ताक्षरकर्ताओं ने दावा किया कि दूरदर्शन, संसद टीवी और आकाशवाणी जैसे आधिकारिक प्लेटफार्म पर प्रसारित पीएम का संबोधन, आदर्श आचार संहिता अवधि के दौरान ”चुनाव प्रचार” के समान था।

पूर्व नौकरशाहों, शिक्षाविदों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों सहित 700 से अधिक लोगों ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 18 अप्रैल का राष्ट्र के नाम संबोधन आदर्श आचार संहिता (MCC) का स्पष्ट उल्लंघन है। चिट्ठी लिखने वाले लोगों ने केंद्रीय चुनाव आयोग से इस मामले में जांच कर ऐक्शन लेने के अलावा सुधारात्मक उपाय की मांग की है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को संबोधित एक शिकायत में, हस्ताक्षरकर्ताओं ने दावा किया कि दूरदर्शन, संसद टीवी और आकाशवाणी जैसे आधिकारिक प्लेटफार्म पर प्रसारित यह संबोधन, आदर्श आचार संहिता अवधि के दौरान ”चुनाव प्रचार” के समान था।

वर्तमान में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आदर्श आचार संहिता लागू है। असम, केरल और पुडुचेरी में नौ अप्रैल को मतदान हुआ था, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को तथा पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है। मतगणना 4 मई को होगी। शिकायत में कहा गया कि इस तरह के संबोधन के लिए सरकार के वित्त पोषण वाली मीडिया का उपयोग सत्तारूढ़ पार्टी को ”अनुचित लाभ” देता है और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए आवश्यक समान अवसर को कमतर करता है।

संज्ञान लें और उचित कार्रवाई शुरू करें

शिकायतकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि मंत्रियों पर आधिकारिक कार्यों को चुनाव प्रचार से जोड़ने और सरकारी तंत्र का इस्तेमाल पक्षपातपूर्ण उद्देश्यों के लिए करने की पाबंदी है। पत्र में निर्वाचन आयोग से इस मामले का संज्ञान लेने, संबोधन की विषयवस्तु और तौर-तरीके की जांच करने और उचित कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया गया। इसमें यह भी मांग की गई कि यदि प्रसारण के लिए पूर्व अनुमति प्राप्त थी तो अन्य राजनीतिक दलों को भी सार्वजनिक प्रसारकों पर समान समय आवंटित किया जाए।

हस्ताक्षरकर्ताओं में मोदी सरकार में मंत्री के पति भी

हस्ताक्षरकर्ताओं में मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति और राजनीतिक अर्थशास्त्री पी. प्रभाकर, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, सामाजिक कार्यकर्ता योगेन्द्र यादव, अर्थशास्त्री जयति घोष, संगीतकार-लेखक टी एम कृष्णा, पूर्व केंद्रीय सचिव ई ए एस शर्मा, कार्यकर्ता हर्ष मंदर, पत्रकार पी. गुहा ठाकुरता, शिक्षाविद जोया हसन और पूर्व राजदूत मधु भादुड़ी शामिल हैं।

अविलंब और शीघ्रता से कार्रवाई हो

अन्य लोगों में पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज, पूर्व सिविल सेवक आशीष जोशी, अमिताभ पांडे और ए. शुक्ला, पत्रकार जॉन दयाल और विद्या सुब्रमण्यम और भाकपा नेता एनी राजा के साथ-साथ कई शिक्षाविद, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि आयोग को ”चुनावी प्रक्रिया की शुचिता को बनाए रखने” के लिए इस मामले में अविलंब और शीघ्रता से कार्रवाई करनी चाहिए।