सीजी न्यूज ऑनलाइन 25 मार्च 2026। हाल ही में दो और भारतीय ध्वज वाले एलपीजी जहाज युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। ये जहाज देश के लगभग एक दिन का गैस भंडार लेकर आ रहे हैं। सरकार ने कई बातों को स्पष्ट किया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर काफी समय से जारी अटकलों के बाद मंगलवार को भारत सरकार की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि तेल समृद्ध फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ने वाले एकमात्र समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए किसी भी देश की इजाजत की जरूरत नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह बातें कही हैं।
फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों को ईरान के साथ किसी तरह के समझौते पर पहुंचने के बाद ही जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दिए जाने की चर्चाओं को खारिज करते हुए, बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि जलडमरूमध्य से आवागमन पोत परिवहन कंपनियों और उनकी अनुबंधित इकाइयों द्वारा सुरक्षा और अन्य स्थितियों पर विचार करने के बाद किया जाता है। गौरतलब है कि ईरान पर अमेरिकी और इजरायल के हमलों और उसकी जवाबी कार्रवाई के कारण जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई थी।
क्या बोले विशेष सचिव?
विशेष सचिव ने इस पर जानकारी देते हुए कहा, ”होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं है।” उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय नौवहन नियमों के अनुसार जलडमरूमध्य में आवागमन की स्वतंत्रता है। चूंकि जलडमरूमध्य संकरा है, केवल प्रवेश और निकासी मार्ग चिन्हित किए गए हैं, जिनका पालन सभी जहाजों को करना होता है। उन्होंने यह भी बताया कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए किसी तरह की फीस या सुरक्षा राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
कितने जहाज फंसे?
अधिकारी ने बताया कि जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे जहाजों में एलपीजी के पांच जहाज शामिल हैं, जिनमें लगभग 2.3 लाख टन रसोई गैस है और इसके अलावा एक खाली जहाज में एलपीजी भरना शुरू कर दिया गया है। वहीं एक एलएनजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक रासायनिक उत्पादों का परिवहन करने वाला टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और तीन अन्य जहाज नियमित रखरखाव के लिए ड्राई डॉक में थे।
भारत के पास कई विकल्प
बता दें कि भारत की जरूरत की एलपीजी का लगभग 85-95 प्रतिशत और गैस का 30 प्रतिशत इसी जलडमरूमध्य से आता है। हालांकि, कच्चे तेल की आपूर्ति में आई रुकावट की भरपाई रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लातिनी अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आंशिक रूप से की गई है, लेकिन औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को गैस और एलपीजी की आपूर्ति में कटौती हुई है।
कई टैंकर आ रहे भारत
इससे पहले एलपीजी टैंकर पाइन गैस और जग वसंत जलडमरूमध्य को पार करने से पहले सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए। दोनों एक-दूसरे के करीब चल रहे हैं। इन जहाजों पर लदी गैस देश में लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर है। पाइन गैस जहाज में 45,000 टन एलपीजी है और यह 27 मार्च को न्यू मंगलौर बंदरगाह पहुंचने वाला है। वहीं जग वसंत जहाज में 47,612 टन एलपीजी है और यह 26 मार्च को गुजरात के कांडला पहुंचेगा। इन दोनों जहाजों में क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविक सवार हैं। ये दोनों जहाज उन 22 भारतीय झंडे वाले जहाज में शामिल हैं जो पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद फारस की खाड़ी में फंस गए थे।

