सीजी न्यूज ऑनलाइन, 09 मार्च 2026। विपक्ष द्वारा लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर विपक्षी सांसदों के साथ भेदभाव करने, उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं देने और सत्ता पक्ष के सदस्यों की अनुचित टिप्पणियों पर कोई कार्यवाही नहीं करने का आरोप लगाया गया।
विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई है। इस प्रस्ताव पर आज सदन में चर्चा होगी। जानकारी के मुताबिक इस अविश्वास प्रस्ताव को सोमवार 9 मार्च की सदन की कार्य सूची में शामिल किया गया है। इससे पहले संसद के मौजूदा बजट सत्र के पहले चरण में विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर पर बड़े आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। 10 फरवरी को दिए गए इस नोटिस पर 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे।
लोकसभा की 9 मार्च की संशोधित कार्य सूची के अनुसार प्रश्नकाल के बाद जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने के उपरांत सबसे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर पश्चिम एशिया की स्थिति पर एक बयान देंगे। इसके बाद कांग्रेस सांसद आर. मोहम्मद जावेद, कोडिकुन्निल सुरेश और मल्लू रवि ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को सदन में पेश करने की अनुमति मांगेंगे। कार्य सूची के अनुसार अगर सदन की अनुमति मिल जाती है तो कल ही प्रस्ताव को लोकसभा में रखा जा सकता है।
ओम बिरला पर क्या आरोप?
विपक्ष द्वारा लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव में लोकसभा अध्यक्ष पर विपक्षी सांसदों के साथ भेदभाव करने, उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं देने और सत्ता पक्ष के सदस्यों की अनुचित टिप्पणियों पर कोई कार्रवाई ना करने का आरोप लगाया गया है। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनता से जुड़े मुद्दे उठाने पर विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, जबकि पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ पूरी तरह आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां करने वाले सत्तारूढ़ दल के सदस्यों को कोई फटकार नहीं लगाई गई।
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि बिरला ने सदन के सभी वर्गों का विश्वास जीतने के लिए जरूरी निष्पक्ष रवैया बनाये रखना बंद कर दिया है; अपने पक्षपातपूर्ण रवैये में वह सदन के सदस्यों के अधिकारों की अनदेखी करते हैं और ऐसे अधिकारों को प्रभावित करने और कमजोर करने के लिए घोषणाएं और फैसले देते हैं; वह सभी विवादित मामलों पर सत्ताधारी पक्ष का खुले तौर पर पक्ष रखते हैं…।”
लोकसभा स्पीकर को हटाने के क्या हैं नियम?
नियमों के मुताबिक प्रस्ताव पर चर्चा के लिए दो सांसदों के साइन, 14 दिन का नोटिस और सदन में 50 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। नोटिस मंजूर होने के बाद, बहस का समय तय किया जाता है और बहस लोकसभा में होती है। नियमों के मुताबिक इस बहस के दौरान स्पीकर अपनी कुर्सी पर नहीं बैठेंगे और डिप्टी स्पीकर कार्यवाही चलाएंगे। हालांकि फिलहाल डिप्टी स्पीकर की गैरमौजूदगी में, स्पीकर के पैनल में सबसे सीनियर सांसद इस चर्चा की अध्यक्षता करेंगे।
विपक्ष को चाहिए कितने वोट?
संविधान के मुताबिक लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए 272 वोट यानी साधारण बहुमत चाहिए। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के समर्थन देने के ऐलान के बाद भी, विपक्ष के पास इतने वोट नहीं हैं। मौजूदा समय में सत्तारूढ़ NDA के पास 293 सांसदों का समर्थन है। इनमें BJP के 240, जेडीयू के 16, टीडीपी के 12, और अन्य पार्टियों के कुछ सीटें शामिल हैं। वहीं विपक्ष के पास मौजूदा समय में महज 238 सांसद हैं, जिनमें से 99 कांग्रेस के हैं। समाजवादी पार्टी, DMK, तृणमूल कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के सांसदों को मिलाकर भी साधारण बहुमत हासिल करना विपक्ष के लिए मुश्किल होगा।
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