सीजी न्यूज ऑनलाइन 22 फरवरी 2026। यूजीसी ने देश में 32 फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जारी की है। दिल्ली के बाद यूपी में सबसे अधिक फर्जी संस्थान हैं। प्रदेश में 4 संस्थान खुद को वैध बताकर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।
यूजीसी ने फरवरी 2026 तक देश भर में 32 फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जारी की है। जिसमें उत्तर प्रदेश से 4 संस्थान भी शामिल हैं। ये संस्थान यूजीसी अधिनियम 1956 के तहत डिग्री देने के लिए अधिकृत नहीं हैं, इसलिए इनकी डिग्री नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए अमान्य मानी जाएगी। साथ ही यूजीसी ने अपील की है कि दाखिला लेने से पहले ugc.gov.in पर संस्थान की मान्यता जांच लें। बता दें कि दिल्ली में सबसे ज्यादा 12 फर्जी विश्वविद्यालय हैं, उसके बाद यूपी दूसरे नंबर पर है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने शनिवार को देश में चल रहे कुल 32 फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जारी कर दी। ये यूनिवर्सिटी खुद को वैध बताकर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। यूजीसी की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 12 संस्थान फर्जी हैं। वहीं, दूसरा नंबर यूपी का आता है। यहां चार फर्जी संस्थान चल रहे थे। आयोग का कहना है कि इन संस्थानों को न ही केंद्र और न ही राज्य की तरफ से मान्यता मिली है।
यूपी के ये संस्थान फर्जी
▪️गांधी हिन्दी विद्यापीठ प्रयाग, इलाहाबाद (प्रयागराज)
▪️महामाया टैक्निकल विश्वविद्यालय पी.ओ. महर्षि नगर, गौतम बुद्ध नगर, नोएडा 201304
▪️नेताजी सुभाष चन्द्र बोस यूनिवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी) अचलताल, अलीगढ़
▪️भारतीय शिक्षा परिषद् भारत भवन, मटियारी चिनहट, फैजाबाद रोड, लखनऊ-227105
यूजीसी ने ईसीसी की स्वायत्तता 2029 तक बढ़ाई
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज यानी ईसीसी की स्वायत्तता को शैक्षणिक सत्र 2024–2025 से 2028–2029 तक के लिए बढ़ा दिया है। यूजीसी का पत्र इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव को संबोधित करते हुए 20 फरवरी 2026 को महाविद्यालय को प्राप्त हुआ।
2018 में हुआ था ईसीसी का विस्तार
कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. एएस मोसेस ने बताया कि स्वायत्तता विस्तार की प्रक्रिया वर्ष 2018 में प्रारंभ हुई थी, जो विभिन्न निरीक्षणों, मूल्यांकनों और आधिकारिक पत्राचार की अनेक चरणों से गुजरते हुए पूर्ण हुई। शनिवार को आयोजित विद्वत परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए प्रो. मोसेस ने सभी हितधारकों को आश्वस्त किया कि सत्र 2025–2026 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ महाविद्यालय शैक्षणिक, आधारभूत संरचना एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहा है। विद्वत परिषद के सदस्य सचिव एवं संयोजक प्रो. जस्टिन मसीह ने परीक्षाओं, परिणामों, पाठ्यक्रम, परीक्षकों की नियुक्ति तथा नई परीक्षा नियमावली से संबंधित प्रस्ताव परिषद के समक्ष प्रस्तुत किए। सर्वसम्मति से अनुमोदित कर दिया गया।

