🔴दुर्ग पुलिस ने अब तक 4 आरोपियों को भेजा सलाखों के पीछे
दुर्ग, 07 फरवरी 2026।नाबालिग पीड़िता के साथ लंबे समय तक दुष्कर्म एवं सामूहिक दुष्कर्म के गंभीर प्रकरण में दुर्ग पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले में फरार चल रहे चौथे मुख्य आरोपी कृपा शंकर उर्फ राजू कश्यप को पुलिस ने विधिवत गिरफ्तार कर लिया है। इस प्रकरण में अब तक कुल चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश लगातार जारी है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणि शंकर चंद्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि 30 जनवरी 2026 को पीड़िता अपनी माता के साथ महिला थाना दुर्ग पहुंची थी, जहां उसने लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन के अनुसार अप्रैल 2018 से अक्टूबर 2025 की अवधि के दौरान पीड़िता के नाबालिग होने की जानकारी के बावजूद कुल 6 आरोपियों द्वारा उसके साथ दुष्कर्म एवं सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं कारित की गईं।
पीड़िता की रिपोर्ट पर महिला थाना दुर्ग में अपराध क्रमांक पंजीबद्ध कर धारा 65(1), 70(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा POCSO एक्ट की धारा 6 एवं 12 के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने पहले ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
इसी क्रम में फरार चल रहे आरोपी कृपा शंकर उर्फ राजू कश्यप के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उसे 07 फरवरी 2026 को दोपहर 1:25 बजे गिरफ्तार किया गया। आरोपी को अभिरक्षा में लेकर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है और उसे शीघ्र ही सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
पुलिस ने बताया कि प्रकरण में शामिल शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
गिरफ्तार आरोपी
- विजय स्वाइन (37 वर्ष), निवासी दुर्गा नगर पश्चिम, भिलाई
- अनिल चौधरी (60 वर्ष), निवासी ज़ोन-01, खुर्सीपार
- गोविंद सिंह नागवंशी (62 वर्ष), निवासी चौकड़िया पारा, वार्ड क्रमांक-35, जिला राजनांदगांव
- कृपा शंकर उर्फ राजू कश्यप (58 वर्ष), निवासी सेक्टर-05, सड़क-09, भिलाई / मूल निवासी गोरखपुर (उ.प्र.)
जप्त सामग्री
विवेचना के दौरान प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक एवं अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य (जांचाधीन)।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि महिला थाना एवं ACCU दुर्ग की विवेचना टीम ने पूरे मामले में संवेदनशीलता, तत्परता और पेशेवर तरीके से कार्रवाई की है।
दुर्ग पुलिस की आम नागरिकों से अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि ऐसे गंभीर एवं संवेदनशील अपराधों की जानकारी बिना किसी भय के तुरंत पुलिस को दें। पीड़ितों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।

