भारत पाकिस्तान 1971 युद्ध स्वर्णिम वर्ष की विजय मशाल पहुंची जिले में, बाइक रैली का कला मंदिर में किया गया हार्दिक अभिनंदन,सम्मानित हुए सैनिक

दुर्ग 15 अक्टूबर । जिला प्रशासन जिला सैनिक कल्याण दुर्ग भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा संयुक्त रुप से सिविक सेंटर स्थित कला मंदिर में आज स्वर्णिम विजय मशाल के पहुंचने पर हार्दिक अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया था इस समारोह भारत-पाकिस्तान 1971 युद्ध में शामिल 18 भूतपूर्व सैनिकों का सम्मान किया गया।

भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 के 50 वर्ष पूर्ण होने पर स्वर्णिम विजय वर्ष के अवसर पर विजय मशाल को लेकर नया रायपुर से रवाना हुई, मोटर साइकिल रैली दुर्ग जिले की सीमा में कुम्हारी में आज सुबह प्रवेश किया। इस मोटरसाइकिल रैली में सेना के जवान, एनसीसी कैडेट्स, भूतपूर्व सैनिक करीब 200 बाइक के साथ चल रहे थे । यह रैली जिले में कुम्हारी प्रवेश करने के बाद चरोदा, भिलाई 3, पावर हाउस अंडर ब्रिज पार करते हुए सेंट्रल एवेन्यू रोड से होते हुए सेक्टर 9 चौक से फॉरेस्ट एवेन्यू ,जेल तिराहा होते हुए महावीर स्कूल के पास कैप्टन सुभाष व्यास के घर पहुंची।
कैप्टन सुभाष व्यास ने वर्ष 1971 के युद्ध में शामिल हुए थे और देश के लिए लड़ाई लड़ी थी । रैली का प्रतिनिधित्व कर रहे मेजर विपिन कौशिक ने बताया कि कैप्टन व्यास हमारे बीच नहीं है । उनकी पत्नी डॉ व्यास के द्वारा विजय मशाल रैली की अगुवाई की गई। विजय मशाल रैली को स्वयं के घर पर पाकर वे बहुत प्रसन्न हुई खुशी से उनकी आज आंखें भी नम हो गई थी। यहां से मोटरसाइकिल रैली सिविक सेंटर स्थित कला मंदिर पहुंची। विजय मशाल यात्रा के भव्य स्वागत के लिए कला मंदिर में जिला सैनिक कल्याण ,जिला प्रशासन एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के द्वारा स्वागत समारोह का आयोजन किया गया था। रैली के कला मंदिर परिसर में पहुंचते ही वहां मौजूद स्कूली छात्र छात्राओं, एनसीसी कैडेट एनएसएस कैडेट ने भारत माता की जय कारे के साथ रैली का अभिनंदन किया।
वहां से विजय मशाल को लेकर नेतृत्वकर्ता मेजर विपिन कौशिक ने कला मंदिर के अंदर प्रवेश किया। अंदर भिलाई इस्पात संयंत्र के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनिर्बन दासगुप्ता, बीएसएफ के आईजी एस के त्यागी पुलिस महा निरीक्षक विवेकानंद सिन्हा जिला प्रशासन से एडीएम नूपुर राशि पन्ना द्वारा स्वागत किया गया। इसके पश्चात वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान के मध्य हुए युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया । वर्ष 1971 के युद्ध की याद को ताजा करते हुए स्मरण किया गया कि इस युद्ध में जांबाज भारतीय सैनिकों के द्वारा कुल 92335 को जिंदा पकड़ कर घुटनों के बल ला दिया गया था । 3 दिसंबर से 16 दिसंबर तक चले इस युद्ध में भारती सेना ने विजय हासिल की थी। इसके साथ वंदे मातरम के जयघोष के साथ हाल गूंज उठा।

इस दौरान समारोह को संबोधित करते हुए भिलाई इस्पात संयंत्र के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनिर्बन दासगुप्ता ने कहां की हम सभी देश की रक्षा में शामिल हैं । सीमा में सैनिकों के द्वारा मुस्तैदी के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाता है। वही किसी न किसी रूप में देश का प्रत्येक नागरिक सुरक्षा में अपनी भागीदारी निभाता है। वर्ष 1971 के युद्ध का स्मरण करते हुए बताया कि उनके पिता भी ऑडनेंस फैक्ट्री में काम करते थे। जिसके कारण उन्हें भी युद्ध के द्वारा होने वाली कठिनाइयों का एहसास है। आज सेल भिलाई इस्पात संयंत्र भी देश की सेना के लिए इस्पात बनाकर किसी न किसी रूप से अपनी भूमिका का निर्वाहन देश की सुरक्षा में कर रहा है।

इसके पश्चात वर्ष 1971 के युद्ध में शामिल 18 सैनिकों का स्वागत करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया । इस सम्मान समारोह में जिला प्रशासन भिलाई इस्पात संयंत्र स्कूली छात्र छात्राएं इस्पात नगरी के नागरिक पूर्व सैनिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
विजय मशाल यात्रा को जनता से मिल रहा अच्छा प्रतिसाद
छत्तीसगढ़ एवं उड़ीसा सब एरिया के मेजर विपिन कौशिक ने बताया कि इस विजय मशाल यात्रा के माध्यम से जब हम अपने भूतपूर्व सैनिकों के मध्य जाते तो अत्यधिक गर्व महसूस करते हैं विगत वर्ष 16 दिसंबर 2020 को चार प्रारूप में यह यात्रा प्रारंभ हुई थी। देश के प्रत्येक कोने में वर्ष 1971 के युद्ध में शहीद हुए एवं शामिल जवानों के घर पर पहुंच रही है ।जनता से भी अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है पूरे भारतवर्ष में वर्ष 1971 में शहीद अथवा शामिल सर्वाधिक जवानों की संख्या 108 इसी शहर से है । सरकार से भी इस यात्रा को अच्छा सहयोग मिल रहा है । जनता के मध्य भी जोश देखा जा रहा है जिस जिस क्षेत्र से यह यात्रा गुजरती है। वहां जनता के द्वारा सेल्यूट किया जाता है। उस स्कूल बरसाए जा रहे हैं यह सब देखकर हमें भी गर्व महसूस होता है।

