पाटन में दोस्त ने दिया दोस्त को धोखा, 27 लाख रुपये के लेन–देन का मामले में FIR

पाटन में दोस्त ने दिया दोस्त को धोखा, 27 लाख रुपये के लेन–देन का मामले में FIR


🛑पुलिस ने प्रार्थी की नहीं सुनी थी फरियाद, न्यायालय आदेश के बाद हुई कार्यवाही

दुर्ग, 21 जनवरी 2026। थाना पाटन में दोस्त द्वारा दोस्त से किए गए विश्वासघात धोखाधड़ी, गाली-गलौज एवं जान से मारने की धमकी से संबंधित एक गंभीर प्रकरण में न्यायालय आदेश के बाद प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई है। प्रकरण में धारा 318, 296, 351(2), 3(5) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध कायम किया गया है।

क्या है पूरा मामला

पाटन पुलिस से प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रार्थी आकाश कुमार शर्मा द्वारा प्रस्तुत परिवाद के अनुसार, वह वर्ष 2017 से प्रोटीन सप्लीमेंट का होलसेल व्यापार कर रहा है। आरोपी अनिरुद्ध ताम्रकार, जो जनपद कार्यालय पाटन में संविदा पर जूनियर इंजीनियर के पद पर पदस्थ है, ने वर्ष 2021 में वेतन न मिलने का हवाला देकर आर्थिक परेशानी बताई और अपनी पत्नी भावना ताम्रकार के नाम से रिसाली (भिलाई–दुर्ग) में प्रोटीन सप्लीमेंट की दुकान खोलने की बात कही। विश्वास के आधार पर प्रार्थी ने आरोपी की पत्नी के नाम से संचालित दुकान आदिशक्ति इंटरप्राइजेस, रिसाली को सितंबर 2021 से अक्टूबर 2021 के बीच लगभग 27 लाख रुपये मूल्य का प्रोटीन सप्लीमेंट सामग्री सप्लाई किया। इसके एवज में आंशिक भुगतान किया गया, लेकिन शेष राशि आरोपी द्वारा लगातार टालमटोल कर नहीं चुकाई गई।

धमकी देने का आरोप

प्रार्थी आकाश के अनुसार, शेष रकम की मांग करने पर आरोपी ने न केवल भुगतान से इनकार किया, बल्कि उसे झूठे मामलों में फंसाने और जान से मारने की धमकी भी दी। इसके बाद आरोपी ने आकाश का फोन उठाना भी बंद कर दिया।

पुलिस व एसपी को शिकायत, नहीं हुई कार्रवाई

प्रार्थी आकाश ने 25 अक्टूबर 2025 को थाना पाटन में शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर धारा 155 के तहत गैर-संज्ञेय प्रविष्टि की गई। इसके बाद 28 अक्टूबर 2025 को पुलिस अधीक्षक दुर्ग को भी लिखित शिकायत दी गई, किंतु कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आकाश ने न्यायालय की शरण ली।

न्यायालय का सख्त रुख

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, पाटन ने प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों, शपथपत्र एवं पुलिस प्रतिवेदन का अवलोकन करते हुए प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध पाया। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश शासन प्रकरण का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
न्यायालय ने थाना प्रभारी पाटन को आदेशित किया कि आरोपियों के विरुद्ध उपरोक्त धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर विधिपूर्ण विवेचना की जाए तथा 15 दिवस के भीतर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए।

पुलिस कार्रवाई

न्यायालय के आदेश के अनुपालन में थाना पाटन में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ कर दी गई है। पुलिस द्वारा मामले से जुड़े सभी तथ्यों, दस्तावेजों एवं लेन–देन की विस्तृत जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि विवेचना के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।