सीजी न्यूज ऑनलाइन 29 दिसंबर। पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी और मिशिगन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर का दावा है कि उन्होंने दुनिया का सबसे छोटा रोबोट तैयार कर लिया है, जिसे अगर आप 1 रुपये के सिक्के के ऊपर रखते हैं तो वह गुम हो सकता है. साथ ही एक चावल का दाना रोबोट एक बड़ी पहाड़ी जैसा लग सकता है. यह रोबोट इंसानी इलाज में भी मदद कर सकेगा.
दुनिया का सबसे छोटा रोबोट आ गया है, जिसका साइज चावल के दाने से भी काफी छोटा है. इसको बनाने वाले डेवलपर का दावा है कि यह उंगलियों की रेखाओं से भी छोटा है, इसके बावजूद इसमें कई सेंसर और सोलर सिस्टम आदि लगाए गए हैं.
इस छोटू रोबोट का साइज इतना छोटा है कि यह आंखों से भी जल्दी ओझल हो सकता है. इसकी चौड़ाई 200X300 माइक्रोमीटर है और थिकनेस सिर्फ 50 माइक्रोमीटर है. वहीं, एक चावल के दाने की थिकनेस 5,500 से लेकर 10 हजार माइक्रोमीटर तक होती है.
इन दो यूनिवर्सिटी ने मिलकर किया है तैयार
इस रोबोट को पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी और मिशिगन यूनिवर्सिटी के डेवलपर ने तैयार किया है. इस रोबोट को तैयार करने वाले डेवलपर्स का दावा है कि अभी तक इससे छोटे से साइज में कोई भी प्रोग्रामेबल रोबोट को तैयार नहीं किया गया है.
फुली प्रोग्रामेबल प्लेटफॉर्म है
डेवलपर्स का दावा है कि यह एक फुली प्रोग्रामेबल प्लेटफॉर्म है जो सिर्फ लिक्विड में डूबने के बाद ही काम करता है. यह मूव कर सकता है, सेंस कर सकता है और उस रिएक्शन भी कर सकता है. साथ ही पावर के लिए सोलर सेल्स लगाए गए हैं.
इंसानी इलाज आदि में यूज हो सकता है
इसके डेवलपर्स का दावा है कि इस रोबोट को इलाज आदि में यूज किया जा सकेगा और दवाइयों से होने वाले रिएक्शन को भी जांचा जा सकेगा.
बॉडी टेम्प्रेचर आदि चेक कर सकता है
ये रोबोट आसानी से टेम्प्रेचर की जांच कर सकता है. यह डांस जैसी मूमेंट के जरिए कम्युनिकेट कर सकता है, जो काफी कुछ मधुमक्खियों के कम्युनिकेशन से इंस्पायर्ड है.
पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के नैनोरोबोटिक्स इंजीनियर मार्क मिस्किन के मुताबिक, यह वास्तव में पहला चैप्टर है. उन्होने दिखाया है कि कैसे बेहद छोटे से डिवाइस में एक दिमाग, एक सेंसर और एक मोटर डाल सकते हैं, और वह महीनों तक सर्वाइव कर सकता है.

