🔴आंदोलनरत सहकारी समिति कर्मचारीयों का किया समर्थन माकपा ने
दुर्ग, 15 नवंबर। चार सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 12 दिनों से धरने पर बैठे 2058 सहकारी समिति के कर्मचारियों के आंदोलन को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी ने समर्थन किया।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी की दुर्ग जिला सांगठनिक समिति का एक प्रतिनिधि मंडल, मानस भवन दुर्ग के सामने धरने पर बैठे सैंकड़ों सहकारी समिति कर्मचारीयों से धरना स्थल पर मिलकर उनको समर्थन दिया।

इस अवसर पर उपस्थित कर्मचारियों को एस. पी. डे, सचिव दुर्ग जिला सांगठनिक समिति,भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) व माकपा नेताओ ने संबोधित करते हुए कहा कि कर्मचारियों की मांगें पूरी तरह जायज है और इन जायज मांगों पर सरकार के नकारात्मक रवैये से आम जनता, विशेष कर किसानों के बीच, धान खरीदी व्यवस्था को बिगाड़ने के साजिश की आशंका उत्पन्न होना स्वाभाविक है।
माकपा नेताओं ने कहा कि सरकार के रवैए से स्वाभाविक रूप से उठने वाले सवाल इस प्रकार हैं:-
धान केंद्रों से संग्रहित धान के उठाव में देरी से होने वाले नुकसान का भार समिति पर क्यों ?
सहकारी समिति पर उठाव में देरी से होने वाले नुकसान का भार डालने से समितियां कैसे चलेगी ?
क्या सरकार यह चाहती है कि सहकारी समितियां धीरे-धीरे घाटे में आकर खत्म हो जाए और धान खरीदी की बनी सुव्यवस्था चरमरा जाए ताकि किसान औने पौने दाम पर व्यापारियों को धान बेचने पर मजबूर हो जाए ?
जब अन्य राज्य सरकार धान प्रबंधन अनुदान हेतु ₹3 लाख प्रतिवर्ष प्रत्येक समिति को दे सकती है तो छत्तीसगढ़ की सरकार क्यों नहीं दे सकती ?
माकपा नेताओं ने आरोप लगाया आरोप लगाया कि सरकार के रवैए से उठने वाले सवालों से स्पष्ट है कि पिछले कई वर्षों में धान खरीदी और उठाव की बनी सुव्यवस्था को बिगड़ने की साजिश है, ताकि धान खरीदी सरकारी समितियां घाटे में आकर बंद हो जाए और समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बाधित हो। ऐसा कर के किसानों को धान उत्पादन से हतोत्साहित करना है ताकि किसान धान की खेती करने के बदले कॉरपोरेट घरानों को बेचने के लिए प्रेरित हो।


