31000 टन स्टील, 30 किमी लंबी और 11,578 ऊंचाई…पाकिस्तान की छाती पर होगा एक और प्रहार

31000 टन स्टील, 30 किमी लंबी और 11,578 ऊंचाई…पाकिस्तान की छाती पर होगा एक और प्रहार


🔴 कब तक तैयार होगी Zojila Tunnel, सेल ने राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को और किया मज़बूत

सीजी न्यूज ऑनलाइन 21 जुलाई। Zojila Tunnel: ज़ोजिला सुरंग का निर्माण चुनौतीपूर्ण हिमालयी भूभाग में किया जा रहा है. यह सुरंग रणनीतिक रूप से 11,578 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है. 2027 तक पूरा होने वाली 30 किलोमीटर से ज्यादा लम्बी सुरंग, द्रास और कारगिल के जरिए से श्रीनगर और लेह के बीच सभी मौसम में महत्वपूर्ण संपर्क प्रदान करेगी.

Zojila Tunnel: लेह-लद्दाख जैसे ठंडे इलाके तक पूरे साल सड़क से पहुंचना काफी मुश्किल होता है, खासकर सर्दियों में जब बर्फबारी की वजह से रास्ते बंद हो जाते हैं. इसी समस्या को हल करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, जिसका नाम जोजिला टनल (Zojila Tunnel) है. यह टनल जोजिला पास (Zojila Pass) या जोजिला दर्रा के नजदीक बनाया जा रहा है, जो कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को जोड़ता है. इस टनल के बनने से पूरे साल लेह-लद्दाख तक सड़क से संपर्क बना रहेगा. इस टनल के निर्माण काम फिलहाल जोरों पर है.

31,000 टन से भी ज्यादा स्टील की पूर्ति

निर्माणाधीन परियोजना जोजिला सुरंग भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग (India’s longest road tunnel) और एशिया की सबसे लंबी Bi-Directional टनल (Asia’s longest bi-directional tunnel) बनने के लिए तैयार है. यहां आपको ये जानकर हैरत होगी कि अभी तक ज़ोजिला टनल प्रोजेक्ट के लिए सेल 31,000 टन से भी ज्यादा स्टील की मुहैया करा चुकी है. अगर सबकुछ पहले से तय तरीके से हुआ तो यह टनल साल 2027 तक बन कर तैयार हो जाएगी.

सेल ने ज़ोजिला सुरंग परियोजना में 31,000 टन से अधिक स्टील की आपूर्ति की

भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी इस्पात उत्पादक महारत्न कंपनी, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), ज़ोजिला सुरंग परियोजना के लिए सबसे ज़्यादा स्टील आपूर्ति करने वाली कंपनी बनकर उभरी है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना, जो अभी निर्माणाधीन है, भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग और एशिया की सबसे लंबी दो-तरफ़ा सुरंग बनने के लिए तैयार है।

सेल, “ज़ोजिला सुरंग परियोजना” में एक बेहद ज़रूरी पार्टनर है। सेल ने इस परियोजना में 31,000 टन से ज़्यादा स्टील दिया है, जिसमें टीएमटी री-बार, स्ट्रक्चरल स्टील और प्लेट्स शामिल हैं। यह प्रोजेक्ट के 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है, और सेल लगातार स्टील सप्लाई कर रहा है, जो कंपनी की अटूट प्रतिबद्धता को दिखाता है। ज़ोजिला सुरंग जैसी बड़ी परियोजनाओं में सेल का योगदान देश के निर्माण में उसकी भूमिका को और मजबूत करता है। ज़ोजिला सुरंग जैसी मेगा-परियोजनाएं सेल स्टील की गुणवत्ता और मजबूती पर हमेशा से भरोसा करती आई हैं, जो कंपनी की गुणवत्ता के प्रति समर्पण और भारत के भविष्य को आकार देने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका का प्रमाण है।

ज़ोजिला सुरंग के बारे में कुछ रोतक जानकारियां

  • ज़ोजिला सुरंग का निर्माण चुनौतीपूर्ण हिमालयी भूभाग में किया जा रहा है.
  • यह सुरंग रणनीतिक रूप से 11,578 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है.
    -2027 तक पूरा होने वाली 30 किलोमीटर से ज्यादा लम्बी सुरंग, द्रास और कारगिल के जरिए से श्रीनगर और लेह के बीच सभी मौसम में महत्वपूर्ण संपर्क प्रदान करेगी.
    -यह सुरंग भारत के नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर, खासतौर से श्रीनगर-कारगिल-लेह हाईवे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
  • इससे क्षेत्र में नागरिक और सैन्य गतिशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
  • यह परियोजना न केवल एक रणनीतिक स्ट्रक्चर परिसंपत्ति है, बल्कि इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर भी पेश करती है.
  • केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 27 मार्च को संसद को बताया कि जम्मू-कश्मीर की ज़ोजिला सुरंग का काम अब 70 फीसदी पूरा हो चुका है.
  • शुरुआत में, सुरंग के निर्माण पर 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आने का अनुमान था, लेकिन यह लगभग 5,500 करोड़ रुपये में ही पूरी हो जाएगी.
  • इस प्रोजेक्ट में एक स्मार्ट टनल या SCADA सिस्टम शामिल है, जिसका निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग विधि का इस्तेमाल करके किया गया है.
    -जोजिला टनल सीसीटीवी, रेडियो कंट्रोल, निर्बाध विद्युत आपूर्ति और वेंटिलेशन जैसी सुविधाओं से सुसज्जित है.