सर्पदंश मुआवजा घोटाले में महिला डॉक्टर, वकील समेत 10 आरोपी जेल भेजे गए

सर्पदंश मुआवजा घोटाले में महिला डॉक्टर, वकील समेत 10 आरोपी जेल भेजे गए


🔴विधानसभा में उठा था 17.24 करोड़ का फर्जी क्लेम का मामला, 14 एफआईआर दर्ज, कई और गिरफ्तारियां संभव

सीजी न्यूज ऑनलाइन, 20 जुलाई 2026। जिले के बहुचर्चित सांप काटने से मौत के फर्जी मुआवजा घोटाले में पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये की सरकारी सहायता हड़पने के मामले में एसडीएम कार्यालय के तीन बाबुओं, एक महिला डॉक्टर, वकील और राजस्व विभाग के कर्मचारियों समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है। सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मामले में अब तक 14 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। पुलिस को इस रैकेट में कई अन्य लोगों की संलिप्तता की भी आशंका है।

मालूम हो कि विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए मामला उठाए जाने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कराई थी। जांच में सामने आया कि बिलासपुर जिले में सांप काटने से मौत के नाम पर फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर 17.24 करोड़ रुपये की सरकारी मुआवजा राशि का दुरुपयोग किया गया।

जांच के दौरान सरकंडा थाना क्षेत्र में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी, जिसका मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराया गया था। बाद में उसी मर्ग नंबर का इस्तेमाल कर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई और मौत का कारण सांप का काटना दर्शा दिया गया।

जांच में पता चला कि तहसील कार्यालय के लिपिक हरिशंकर राठौर, एसडीएम कार्यालय के लिपिक नरेंद्र कौशिक तथा गरीब बिंझवार ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और कलेक्टोरेट में मुआवजे का दावा प्रस्तुत कराया। इतना ही नहीं, जिस व्यक्ति के नाम पर सहायता राशि निकाली गई, उसकी पहचान भी पूरी तरह फर्जी निकली।

पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह इस पूरे मामले की जांच की स्वयं निगरानी कर रहे हैं। पुलिस अब उन सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है, जिन्होंने फर्जी रिपोर्ट, दस्तावेज या मुआवजा प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर सहयोग किया।

तोरवा थाना क्षेत्र में भी सांप काटने से मौत के फर्जी पोस्टमार्टम तैयार करने के मामले में पूर्व में सिम्स से जुड़ी डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

इससे पहले इसी प्रकरण में सफीना बानो, संतोष सूर्यवंशी और अधिवक्ता राजेंद्र कुमार चतुर्वेदी की गिरफ्तारी हो चुकी थी। जांच में सामने आया कि महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की वास्तविक मौत का कारण छिपाकर सांप काटने से मौत की फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई थी। पुलिस के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में डॉ. प्रियंका सोनी और उनके पति निहित सविता मोहन की भूमिका है।

जांच के दौरान सामने आया कि पिछले तीन वर्षों में जशपुर जिले में जहां सांप काटने से 96 मौतें दर्ज हुईं, वहीं अकेले बिलासपुर जिले में 431 मौतें दर्ज कर 17.24 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया गया। आंकड़ों में भारी अंतर सामने आने के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी।

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने विधानसभा में उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

सरकारी नियमों के अनुसार, सांप काटने से मृत्यु होने पर परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। जांच में सामने आया कि कई मामलों में प्राकृतिक या अन्य कारणों से हुई मौत को सांप के काटने से हुई मौत बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। कुछ मामलों में तो मृतकों के परिजनों की जानकारी या सहमति के बिना ही मुआवजे की राशि निकालकर हड़प ली गई। पुलिस ने बताया है कि अभी जांच जारी है, एक वकील सहित कई आरोपी फरार हैं, उनकी भी गिरफ्तारी की जाएगी।